By अनन्या मिश्रा | Jul 06, 2026
सिंधु नदी भारतीय संस्कृति, सभ्यता और इतिहास का आधार मानी जाती है। इसी के चलते हर साल लद्दाख क्षेत्र में सिंधु-दर्शन कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें देश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। बिहार राज्य के लोगों के लिए सिंधु-दर्शन तीर्थयात्रा का अधिक महत्व है। इस यात्रा में होने वाले अधिक खर्च की वजह से राज्य के निवासियों के सामने इस अहम धार्मिक यात्रा को पूरा करने में कठिनाई होती है।
आवेदक को बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
आवेदक की उम्र 18 साल या इससे ज्यादा होनी चाहिए।
यात्रा पूरी करने के बाद अनुदान का लाभ दिया जाएगा। वहीं आवेदक को यात्रा का पूरी करने का संबंधित प्रमाण और व्यय से संबंधित डॉक्यूमेंट्स करना होगा।
एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार इस योजना का लाभ ले सकता है।
राज्य या केंद्र सरकार की अन्य समरूप योजना से लाभ लेने वाले व्यक्ति अनुदान के पात्र नहीं होंगे।
इस योजना के तहत हर वित्तीय वर्ष में अधिकतम 100 तीर्थ यात्रियों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इस योजना के तहत तीर्थयात्रियों/यात्री समूह को यात्रा पूरी करने के बाद वित्तीय सहायता के रूप में यात्रा व्यय के 50% या 20 हजार रुपए की अनुदान दी जाएगी। तीर्थ-यात्रियों के खाते में सीधे अनुदान की राशि बैंक हस्तांतरण के जरिए जरिए दी जाएगी।
इस योजना के तहत अनुदान भुगतान से संबंधित कार्रवाई पर्यटन निदेशालय बिहार पटना के लेवल से की जाएगी। आवेदकों के आधार, पैन, स्थायी निवास प्रमाण-पत्र और यात्रा व्यय के संबंध में अंडरटेकिंग आदि के साथ अपना आवेदन बिहार के पटना पर्यटन निदेशालय, निदेशक के समक्ष करना होगा।
पर्यटन निदेशालय के द्वारा आवेदनों की जांच और फिर 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर 100 तीर्थ-यात्रियों का सिलेक्ट कर अनुदान वितरण के संबंध में अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष में अधिकतम 100 पर्यटकों को अनुदान प्रतिपूर्ति की जाएगी। इस आधार पर अधिकतम 20,00,000 रुपए मात्र व्यय प्रत्येक वित्तीय वर्ष में संभावित है।