बूढ़े से शख्स ने शहादत देकर मुल्क बचाया, ग्रैंड मोसल्ला से ईरान पर इमरान ने लूट ली महफिल

By अभिनय आकाश | Jul 06, 2026

ईरान की राजधानी तेहरान आज एक ऐसे ऐतिहासिक और भावुक जनसैलाब की गवाह बन रही है जिसे दुनिया शायद ही कभी भूल पाए। पूर्व सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम विदाई में पूरा ईरान सड़कों पर उतर आया है। दुनिया भर के नेता और उनके समर्थक उन्हें नम आंखों से विदाई देने तेहरान पहुंच रहे हैं। लेकिन जो लोग वहां नहीं पहुंच पाए वो अपने-अपने अंदाज में इस कद्दावर नेता को याद कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारत से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ ने अली खामनेई को एक बेहद खास और काव्यात्मक श्रद्धांजलि दी। इमरान की यह शायरी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इमरान ने इस दौरान शायराना अंदाज में कहा कि सब कुछ नछावर करके भी फर्ज निभाया जाता है। इस दुनिया से वापस जाने को ही आया जाता है। इस दुनिया से वापस जाने को ही आया जाता है। इस दुनिया से वापस जाने को ही आया जाता है। एक बूढ़े से शख्स ने सारी दुनिया को ये बता दिया।

पूरे तैहरान में सिर्फ सिसकियों और नारों की आवाजें गूंज रही हैं। इस ऐतिहासिक विदाई में दुनिया भर से लोग अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं।

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भारत में भी राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इसकी चर्चा है। कांग्रेस सांसद और देश के जानेमाने शायर इमरान प्रतापगढ़ ने भी अपने चिर परिचित अंदाज में अली खामन को याद किया। इमरान ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक बेहद जज्बाती पोस्ट लिखा जिसमें उन्होंने अली खामने के जीवन उनके संघर्ष और उनके आखिरी बलिदान को शब्दों में पिरोया। इमरान प्रतापगढ़ ने लिखा सब कुछ न्योछावर करके ही फर्ज निभाया जाता है। इस दुनिया से  वापस जाने को ही आया जाता है। यह पोस्ट बताता है कि खामने का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं था बल्कि दुनिया भर के लोग उनके मुल्क के प्रति उनके जज्बे को किस नजरिए से देखते हैं।

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तेहरान के विभिन्न स्थलों पर हजारों की संख्या में लोग जुट चुके हैं और वे खामेनेई के सम्मान में झंडे तथा बैनर लहरा रहे हैं। शोक के मद्देनजर प्रशासन ने प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया है। हवाई क्षेत्र पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। शनिवार से शुरू हुआ यह राष्ट्रीय शोक बृहस्पतिवार को समाप्त होगा। इसके बाद 86 वर्षीय खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस बीच, अमेरिका ईरान के साथ उन वार्ताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, जिनका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह फिर से खोलना, उसके विवादित परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना है। हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि ये वार्ताएं अंतिम संस्कार संपन्न होने तक स्थगित रहेंगी। हालांकि, अंतिम संस्कार के दौरान खामेनेई की मौत का बदला लेने की मांग भी तेज होती जा रही है। सोमवार सुबह अंतिम यात्रा में शामिल फातिमा हसन ने कहा, ‘‘आज हम अपने नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए हैं। यह हमारे लिए बेहद पीड़ादायक दिन है। हम यहां उन्हें अंतिम विदाई देने नहीं, बल्कि उनका बदला लेने आए हैं। और हम यह बदला लेकर रहेंगे।

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