बिहार: दीपावली के बाद सातवीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार!

By रेनू तिवारी | Nov 11, 2020

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम 10 नवंबर को देर शान सामने आ गये और एक बार भी एनडीए ने बिहार में अपनी सरकार बनाने के लिए तैयार है। पूर्ण बहुमत के साथ जनता दल  यूनाइटेड और भाजपा सहित गठबंधन के अन्य साथी बिहार में सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। आरजेडी ने इस बार काटे की टक्कर दी लेकिन इसके बाद भी एनडीए को बहुतम मिल गया। बहुमत तो मिला लेकिन इस बार बिहार में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली जनता दल यूनाइटेड को काफी नुकसान हुआ हैं। परिणामों के अनुसरा बीजेपी को 74 सीटे मिली तो वहीं जेडीयू को 43 सीटों पर ही सिमटना पड़ा। पिछली बार के मुकाबले ये काफी कम है। 

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जदयू नेता केसी त्यागी ने जेडीयू को कम सीट मिलने के पीछे चिराग पासवान की पार्टी को जिम्मेदार माना हैं। उन्होंने कहा कि जनता दल यूनाइटेड को इस चुनाव में चिराग पासवान के कारण घाटा उठाना पड़ा है। वह एनडीए के शत्रु नंबर वन हैं, उनका NDA की पॉलिटिक्स, परसेप्शन और विकास से कोई वास्ता नहीं है। 

 

बिहार में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत प्राप्त कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया। भले ही राजग ने बहुमत हासिल किया है, लेकिन इस चुनाव में विपक्षी ‘महागठबंधन’ का नेतृत्व कर रहाराष्ट्रीय जनता दल (राजद) 75 सीटें अपने नाम करके सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरा है। मतगणना के शुरुआती घंटों में बढ़त बनाती नजर आ रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 16 घंटे चली मतों की गिनती के बाद 74 सीटों के साथ दूसरा स्थान मिला।

 

विपक्षी महागठबंधन ने कुल 110 सीटें जीतीं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद के सर्वाधिक सीटें हासिल करने के बावजूद महागठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाया। राजग के बहुमत हासिल करने के साथ ही नीतीश् कुमार के लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह साफ हो गई है। हालांकि इस बार उनकी पार्टी जद(यू) को 2015 जैसी सफलता नहीं मिली है। जद(यू) को 2015 में मिली 71 सीटों की तुलना में इस बार 43 सीटें ही मिली हैं। उस समय कुमार ने लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव जीता था।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा समेत राजग पहले ही कुमार को मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका हैं। इसलिए भले ही कुमार की पार्टी का प्रदर्शन गिरा है, कुमार चौथी बार सरकार का नेतृत्व करेंगे। जद(यू) को चिराग पासवान की लोकतांत्रिक जनता पार्टी (लोजपा) के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है।

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