By अंकित सिंह | Sep 24, 2026
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को कोसी नदी प्रणाली के लिए बाढ़ के जोखिम को कम करने की एक लंबी अवधि की रणनीति बनाने का निर्देश दिया है। इसमें गाद (silt) के प्रबंधन और एक नए बैराज के निर्माण पर ज़ोर दिया गया है। ये निर्देश जल संसाधन, सड़क संपर्क और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि समीक्षा में गंगा, गंडक और कोसी नदी प्रणालियों, बक्सर-भागलपुर छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, 2400 मेगावाट (3×800 मेगावाट) के पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट और पीएम-कुसुम सौर ऊर्जा योजना से जुड़ी परियोजनाएं शामिल थीं।
गंडक नदी प्रोजेक्ट के बारे में, चौधरी ने तटबंधों पर सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बक्सर-भागलपुर ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे की समीक्षा की, जो 348.196 किलोमीटर लंबा है—इसमें से 336.205 किलोमीटर बिहार में और लगभग 12 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में है—और अधिकारियों से कहा कि वे इसके काम में तेज़ी लाएँ। साथ ही, गंगा-अंबिका पथ (बिदुपुर-दिघवारा), नारायणी पथ (दरिहारा-डुमरिया घाट) और विश्वामित्र पथ (बक्सर-आरा-मनेर) के काम में भी तेज़ी लाएँ और यह पक्का करें कि ये तय समय में पूरे हो जाएँ।
ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट और बांका थर्मल पावर प्लांट के काम की प्रगति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री चौधरी ने कृषि क्षेत्र को भरोसेमंद बिजली सप्लाई देने के साथ-साथ सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए PM-KUSUM योजना के तहत एग्रीकल्चर फीडर के सोलराइजेशन (सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था) का काम जल्द पूरा करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सरकारी ट्यूबवेल को सौर ऊर्जा से चलाने की कोशिशें बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रबंधन के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाने को कहा, जिसमें गंगा, कोसी और गंडक नदियों का व्यवस्थित प्रबंधन शामिल हो। इस योजना में दोनों तरफ के तटबंधों को मज़बूत करना और उनके ऊपर चार-लेन वाली सड़कें बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद इन नदी घाटियों में बाढ़ से प्रभावित लोगों को स्थायी राहत देना और इस इलाके को एक समृद्ध क्षेत्र में बदलना है।