By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 28, 2026
बिल गेट्स का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। 28 अक्टूबर, 1955 को वाशिंगटन में जन्मे बिल ने वर्ष 1975 में पाल एलन के साथ मिलकर सॉफ्टवेयर कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की। तब कौन जानता था कि एक दिन यह दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी बन जाएगी और गेट्स पर्सनल कंप्यूटर के क्षेत्र में क्रान्ति के अग्रदूत बनेंगे। उनकी तरक्की की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 32 साल पूरे होने के पहले ही 1987 में उनका नाम अरबपतियों की फ़ोर्ब्स सूची में आ गया और कई साल तक वह इस सूची में पहले स्थान पर रहे। अथाह धन होने के बावजूद बेहद सामान्य और सहज जीवन बिताने वाले बिल गेट्स अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा धर्मार्थ कार्यों एवं समाज सुधार पर खर्च करते हैं। उन्होंने दो किताबें भी लिखीं हैं, द रोड अहेड और बिजनेस @ स्पीड ऑफ़ थॉट्स। 28 अक्टूबर 2020 को पर्यटन और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल दूर दराज के समुदायों को सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने वाले भारतीय संगठन ग्लोबल हिमालयन एक्सपीडिशन (जीएचई) को कोविड-19 महामारी के बीच भी जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘यूएन ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। जीएचई दुनिया का पहला संगठन है जो पर्यटन और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल दूर दराज के समुदायों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने में करता है। जीएचई ‘इम्पैक्ट एक्सपीडिशन’ के तहत पर्यटन से मिले शुल्क और अन्य राशि का इस्तेमाल गांवों में सौर पैनल खरीदने, परिवहन, स्थापित करने और ग्रामीणों को प्रशिक्षित करने में खर्च करता है ताकि बिजली के सूक्ष्म ग्रिड का परिचालन वे स्वयं कर सकें।