By अंकित सिंह | Jun 30, 2021
गलवान घाटी विवाद के बाद भारत ने LAC पर अपनी चौकसी बढ़ा दी है। भारत लगातार एलएसी पर अपनी निगरानी रख रहा है और चीन की हर गतिविधि का जवाब देने की तैयारी में है। यही कारण है कि पिछले दो दिनों में हमने देखा कि भारत की ओर से एलएसी पर दो दिग्गज पहुंचे थे। एक ओर लद्दाख की यात्रा पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे तो उसके बाद हिमाचल प्रदेश में एलएसी के फ्रंट पर सीडीएस बिपिन रावत पहुंचे। भारत में लगातार पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद की गतिविधियां बढ़ रही है। पिछले दिनों जम्मू के इलाके में ड्रोन से हमले की कोशिश भी हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि पाकिस्तान यह सब चीन के इशारे पर ही कर रहा है। ऐसे में रक्षा मंत्री और सीडीएस का सीमा दौरा अपने आप में बेहद ही महत्वपूर्ण है।
वहीं, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल विपिन रावत ने हिमाचल प्रदेश सेक्टर में चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया और संवेदनशील क्षेत्र में भारत की सैन्य तैयारियों का जायजा लिया। जनरल रावत ने चंडीमंदिर में भारतीय सेना की पश्चिमी कमान के मुख्यालय का भी दौरा किया जहां उन्होंने पाकिस्तान के साथ लगती सीमा पर अभियान संबंधी स्थितियों की समीक्षा की। एलएसी पर अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों के साथ वार्तालाप में जनरल रावत ने आह्वान किया कि देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के अपने काम में अडिग होकर लगे रहें। एलएसी पर सुमदोह सेक्टर में उनका दौरा ऐसे समय में हुआ जब पूर्वी लद्दाख में टकराव के अनेक बिंदुओं पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच सैन्य गतिरोध बना हुआ है।