बीरभूम हिंसा को लेकर विपक्ष के हमलों से चौतरफा घिरी ममता बनर्जी सरकार

By नीरज कुमार दुबे | Mar 23, 2022

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता की ‘हत्या’ के कुछ देर बाद संदिग्ध तौर पर रामपुरहाट के करीब एक गांव में दर्जनभर झोपड़ियों को आग लगा दी गई जिनमें दो बच्चों और तीन महिलाओं समेत आठ लोगों की जलने से मौत हो गई। इसके बाद विपक्षी भाजपा ने राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। खबर है कि सभी आठ मृतकों को मंगलवार रात को जिले के अधिकारियों की मौजूदगी में दफन कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि वयस्क मृतकों की पहचान मीना बीबी, नूरनिहार बीबी, रूपाली बीबी, बानी शेख, मिहिर शेख और नेकलाल शेख के तौर पर हुई है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि हम यह मामला संसद में भी उठाएंगे क्योंकि 2 दिन में 13 लोगों की हत्या हुई है और कई लोग गायब हैं। उन्होंने कहा कि एक घर में बंद करके महिला और बच्चों को जलाया गया। दिलीप घोष ने कहा कि हमने इस विषय को गृह मंत्री को बताया है। दिलीप घोष ने कहा कि सीरिया-अफगानिस्तान में ऐसी घटना होती है। उन्होंने कहा कि तृणमूल नेता की हत्या के बदले में ये घटना हुई है। पुलिस की कार्रवाई पर भी लोगों को शक है, वहां भय का माहौल है।

इस मामले में तृणमूल कांग्रेस सरकार को घेरते हुए माकपा और कांग्रेस ने भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने कहा है कि जब यहां गुंडे आए तब कुछ नहीं कहा गया। जिनकी मृत्यु हुई उन्हें न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सचिवालय की छत्र-छाया में अराजकता हो रही है। मोहम्मद सलीम ने कहा कि पेट्रोल के बम से आग लगाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जो बयान तृणमूल के नेता ने दिया वही बयान पुलिस दे रही है, जो दर्शाता है कि ये मिलीभगत है।

वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में आज मानव राज नहीं दानव राज चल रहा है। उन्होंने कहा कि 10 महिलाओं और 2 बच्चों को आग के हवाले करके जिंदा जलाया गया। इससे ज़्यादा घिनौना और क्या हो सकता है। यहां बाइट लग जायेगी।

हम आपको बता दें कि इस मामले को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच भी बयानबाजी हो रही है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ द्वारा रामपुरहाट में आठ लोगों की मौत की घटना को भयावह करार देने और राज्य के ‘हिंसा एवं अराजकता’ की संस्कृति की गिरफ्त में होने का दावा करने के कुछ घंटे बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे ‘अनुचित बयान देने से बचने’ का आग्रह किया।

उधर इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए बंगाल सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम ने भाजपा से सवाल पूछा है कि उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था कहां थी जब 8 पुलिसकर्मी एनकाउंटर में मारे गए और गुजरात में जहां 2,000 लोगों की हत्या की गई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी किसी भी तरह के अन्याय का समर्थन नहीं करती हैं और इसे भी नहीं करेंगी। फिरहाद हकीम ने कहा कि SIT घटना की जांच करेगी, जांच पर हमें पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवार की हर तरह से मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि बंगाल में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक है, विपक्षी दल षड़यंत्र कर रहे हैं ताकि बंगाल का अपमान किया जा सके।

दूसरी ओर, बीरभूम के हालात की बात करें तो रिपोर्टें हैं कि हिंसा के बाद स्थानीय लोग अपने घरों को छोड़कर दूसरे स्थान जा रहे हैं। एक महिला ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "सुरक्षा के मद्देनज़र हम घरों को छोड़कर जा रहे है, जिनकी मृत्यु हुई उनमें से एक मेरा देवर था। पुलिस ने किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं दी, सुरक्षा होती तो ये घटना न घटती।" 

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जहां तक इस मामले में पुलिस का पक्ष है तो हम आपको बता दें कि पुलिस महानिदेशक मनोज मालवीय के मुताबिक, कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एडीजी (सीआईडी) ज्ञानवंत सिंह के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया है।

जहां तक इस पूरे घटनाक्रम की बात है तो रिपोर्टें हैं कि रामपुरहाट शहर के बाहरी हिस्से में स्थित बोगतुई गांव के निवासियों की आंख बम धमाकों की आवाज़ों से खुली। स्थानीय ग्रामीणों ने आग बुझाने की कोशिश की और पुलिस और दमकल को मदद के लिए बुलाया। लेकिन आग की लपटों में दो बच्चों सहित सात की मौत हो गई, जबकि बचाए गए एक अन्य शख्स की बाद में अस्पताल में मौत हो गई। इस घटना में जीवित बचने वालों में से एक, नजीरा बीबी ने रामपुरहाट में अस्पताल में बताया, “हम सो रहे थे और अचानक बमों की आवाज सुनी … बदमाशों ने हमारे घरों में आग लगा दी। मैं भागने में सफल रही, लेकिन यह नहीं जानती कि परिवार के अन्य लोगों के साथ क्या हुआ है।” वाकई बंगाल में जिस तरह की हिंसा खासतौर पर राजनीतिक हिंसा की घटनाएं आम रहती हैं वह दिल दहलाने वाला है। भाजपा का तो बड़ा आरोप है कि पूरा पश्चिम बंगाल आज बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है।

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