By Ankit Jaiswal | Jul 31, 2026
भारतीय मुद्रा के लिए शुक्रवार का कारोबारी दिन राहत भरा रहा। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी और भारतीय रिजर्व बैंक के समर्थन से रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी मजबूती बरकरार रखी। हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण रुपये की तेजी सीमित रही। बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम भारतीय मुद्रा की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को भी रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 95.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र था, जब भारतीय मुद्रा में मजबूती दर्ज की गई थी। लगातार सुधार से यह संकेत मिल रहा है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर भारतीय बाजार की ओर बढ़ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर की बिक्री ने रुपये को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से घरेलू शेयर बाजार में लगातार निवेश भी भारतीय मुद्रा के पक्ष में रहा है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार के अनुसार, पिछले तीन कारोबारी दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 7,360 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। उन्होंने कहा कि पहले लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी निवेशकों का दोबारा खरीदारी की ओर लौटना रुपये के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
घरेलू शेयर बाजार की बात करें तो निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा। बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक 166.49 अंकों की बढ़त के साथ 78,094.64 पर बंद हुआ, जबकि राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक 66.45 अंक चढ़कर 24,383.60 के स्तर पर पहुंच गया है। विनिमय आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप से 3,623.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं, जिससे बाजार के साथ-साथ रुपये को भी मजबूती मिलने में मदद मिली है।