वफा के बिस्कुट (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Dec 31, 2021

सर्दी के मौसम में भी कोल्डड्रिंक खरीदते हुए मैंने दुकानदार से पूछा, क्या आप के पास कुत्तों के लिए भी कोल्डड्रिंक है। बुज़ुर्ग सेल्समैन हंसने लगा बोला, कुत्तों के बिस्कुट तो अंग्रेज़ों के ज़माने से सुनते आए हैं मगर  कोल्डड्रिंक, हां, हमारे एक काबिल फायनांस मिनिस्टर ने बजट में कुत्तों के बिस्कुट ज़रूर सस्ते किए थे। अगर दोबारा ऐसा हो गया तो घर की वित्तमंत्री घर का बजट रिव्यू कर हुक्म जारी कर देगी कि बिस्कुट सस्ते हो गए हैं, ज़्यादा ले आना। उन्हें बताना पड़ेगा कि कुत्तों वाले बिस्कुट सस्ते हुए हैं आदमी वाले नहीं और हमने कुत्ता नहीं पाला हुआ है। हमें मालूम है बिस्कुट अपने व आपके लिए मंगा रही हूं, इससे बहुत फायदा होने वाला है, पत्नी समझाएगी।

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उनसे पूछेंगे क्या फायदा होगा। सबसे ज़रूरी फायदा, एक दूसरे के प्रति वफादारी बढ़ेगी। समाज में सामाजिक जानवर बहुत ज्यादा हो गए हैं इसलिए हम कुत्तों वाले बिस्कुट खाकर अपने आप को कुत्तों की तरह चौकन्ना रख सकेंगे वह बात दीगर है कि आदमी के रूप में चौक्कना रहने की कोशिश में तो फेल हो गए। कोई परेशान करे, गाली दे तो हम चुपचाप सहन करते आए हैं बिस्कुट खाएंगे तो दो चार सुनाने की हिम्मत हम में भी आ जाएगी। किट्टी में बॉस की पत्नी चित कर देती है बिस्कुट खाऊंगी तो उसे शांत कर सकूंगी।


सामाजिक स्तर उठाने के लिए, कुत्तों के बिस्कुट सस्ते हो जाने पर, आम आदमी द्वारा खाने के फायदे ही फायदे हो सकते हैं। इसलिए पत्नी चुप नहीं रह पाएगी ज़ोर देकर कहेगी, किसी की गलत बात पर कुछ सही कह दो तो लोग काट खाने को आते हैं, बिस्कुट खाने से बदलाव आ सकता है और हम भी लोगों को काट खाने को दौड़ सकते हैं। पुलिस सूरज की रोशनी में हो रही चोरियों को भी नहीं रोक पाती, बिस्कुट नियमित खाने से हम ज्यादा स्मार्ट व हैल्दी हो जाएंगे दिन में भी दफ्तर से घर का एक चक्कर लगा जाया करेंगे, रात को सोते हुए भी कुत्तों की तरह ऊंघा करेंगे ज़रा सी आहट होने पर भौंकना शुरू कर देंगे। इससे पुलिस को भी आराम मिलेगा।

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पत्नी और समझाएगी कि कुत्तों वाले बिस्कुट खाने से हमारा पशु प्रेम भी बढ़ेगा जोकि नेताओं की तरह नकली नहीं होगा। साथ साथ हम अपने पड़ोसियों, मित्रों, रिशतेदारों को वफ़ा के बिस्कुट खाने को प्रेरित करेंगे, उन्हें चाय स्नैक्स के साथ स्पेशलिटी के रूप में खिलाएंगे तो उनमें भी वफादारी, प्रेम, आपसी सदभाव जैसी विलुप्त होती जा रही भावनाओं का उदय होगा। पत्नी को कहेंगे कि बड़ी मुश्किल से तो मानव जन्म मिला ताकि मनमानी कर सकें क्यूं जीतेजी कुत्ता... अब बस भी करो। अब पत्नी ज़्यादा जोर देकर कहेगी, मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विशवास है कि अगर ऐसा हो जाए तो आदमियत से ही बेवफा होता जा रहा आदमी बिस्कुट खाकर वफादारी के गुण ग्रहण कर सकता है। चुप होते होते भी पत्नी कह डालेगी, अपने कर्तव्यों से विमुख होते जा रहे नेताओं, अफसरों व संस्कृति का कचरा करने वाले कलाकारों को भी नियमित रूप से इन वफाबढ़ाऊ बिस्कुटों का सेवन कराया जाना चाहिए।


हमको यह संदेश देश के कोने कोने में पहुंचा देना चाहिए कि वफ़ा के बिस्कुट नियमित खाते रहें तो समाज में बेवफाई निश्चित रूप से कम होने लगेगी।  


- संतोष उत्सुक

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