By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 05, 2026
नयी दिल्ली/लखनऊ, पांच अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए राज्य के मंत्री धर्मपाल सिंह समेत आठ उम्मीदवारों के नामों की सोमवार को घोषणा की। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अगले महीने अपना कार्यकाल पूरा करने वाले अन्य सभी सदस्यों को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया है। भाजपा ने झारखंड के राज्यपाल एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को भी राज्य से अपना उम्मीदवार बनाया है।
केंद्रीय मंत्री वर्मा का नाम भी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में शामिल नहीं है। भाजपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने सामाजिक, क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों में संतुलन को ध्यान में रखते हुए इन आठ उम्मीदवारों के नामों को मंजूरी दी है। भाजपा के एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सूची में तीन उम्मीदवार अगड़ी जातियों से हैं, जिनमें ब्राह्मण जाति से आने वाले राधाकांत ओझा और गोपीकृष्ण पांडेय शामिल हैं।
वहीं तीन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से और दो अनुसूचित जाति (एससी) से हैं। आठ उम्मीदवारों में से दो महिलाएं हैं।’’ उत्तर प्रदेश के मंत्री धर्मपाल सिंह (लोध), श्रुति गंगवार (कुर्मी) और प्रकाश पाल ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत दलित हैं तथा राम प्रताप सिंह चौहान ठाकुर हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की 12 सीट के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होंगे।
इनमें उत्तर प्रदेश की 10 सीट और उत्तराखंड की एक सीट शामिल है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव होगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की राज्यसभा सीट भी 11 सितंबर से रिक्त है। उनका इस्तीफा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद 11 सितंबर से प्रभावी हुआ था। भाजपा के सभी आठ उम्मीदवार मंगलवार को नामांकन दाखिल करेंगे, जो इसके लिए आखिरी दिन है।
समाजवादी पार्टी (सपा) पहले ही दो उम्मीदवारों—राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह के अध्यक्ष धनराज परिमल नाथवानी—के नाम घोषित कर चुकी है। भाजपा द्वारा सोमवार को उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाने के बाद अब इतनी ही सीट के लिए 10 उम्मीदवार मैदान में हैं। यदि मंगलवार को नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने तक स्थिति ऐसी ही रहती है, तो सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे।
वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कुछ ही महीने दूर हैं और भाजपा तथा सपा दोनों ही अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी हैं। सपा ने नामांकन पत्रों के तीन सेट खरीदे हैं और भाजपा ने भी नामांकन पत्रों के नौ सेट खरीदकर मुकाबले की संभावना को बरकरार रखा है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों दल मुकाबले को दिलचस्प बनाने की तैयारी में हैं।
भाजपा के ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश पाल ने पार्टी का राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के तुरंत बाद संवाददाताओं से कहा, “हमारे सभी उम्मीदवार आसानी से जीतेंगे। वास्तव में, हम नौवें उम्मीदवार की जीत भी सुनिश्चित कर सकते हैं।” पाल को उत्तर प्रदेश के मंत्री जे. पी. एस. राठौर से गले मिलते हुए देखा गया। राठौर उत्तर प्रदेश में पिछले उन राज्यसभा चुनाव में प्रमुख रणनीतिकार रहे हैं, जिनमें मुकाबला हुआ था।
सपा भी मुकाबले को लेकर असमंजस की स्थिति बनाए हुए है। सपा के चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह ने पहले ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा था, “बेशक, हम तीसरा उम्मीदवार उतारेंगे।” सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा भी पहले ऐसा ही कह चुके हैं। भाजपा की सूची में शामिल आठ में से कुछ नामों ने कई लोगों को हैरान किया है।
उदाहरण के लिए, राधाकांत ओझा जो इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं। भाजपा में आम धारणा है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट रखने के लिए ऐसे नाम चुने गए हैं। भाजपा ने उत्तर प्रदेश के मंत्री धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाकर संतुलन साधने की भी कोशिश की है।
वह लोध समुदाय के नेता और आंवला विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के मौजूदा विधायक हैं। माना जा रहा है कि उन्हें राज्यसभा के लिए चुना जाना प्रमुख लोध नेता बी. एल. वर्मा को सूची से बाहर किए जाने की भरपाई की कोशिश है। भाजपा के एक नेता ने कहा, “हो सकता है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की उनके बारे में कुछ योजनाएं हों।” उन्होंने कहा कि राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में नामों को लेकर फैसला सोच-समझकर किया गया है।
भाजपा नेता ने कहा, “उत्तर प्रदेश भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रमुख प्रकाश पाल को देखिए, जो आठ उम्मीदवारों में शामिल हैं। ओबीसी तक पहुंच बनाने के अलावा, इसका उद्देश्य बसपा और सपा के प्रदेश अध्यक्षों के जातिगत प्रभाव को संतुलित करना भी है, क्योंकि दोनों ही पाल समुदाय से हैं।” सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल हैं, जबकि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के दलित नेता हैं, की जगह एक अन्य दलित नेता विद्यासागर सोनकर को उम्मीदवार बनाया गया है।
सोनकर लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं और संगठन में कई पदों पर रह चुके हैं। भाजपा की एक अन्य उम्मीदवार प्रियंका सिंह रावत ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बाराबंकी से पार्टी का टिकट नहीं मिलने पर सार्वजनिक रूप से रोते हुए अपनी निराशा जाहिर की थी। इसके बाद उन्हें पार्टी संगठन में जिम्मेदारी दी गई और अब उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया गया है।
भाजपा के एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “यह स्पष्ट संदेश है कि पार्टी उन लोगों को पुरस्कृत करती है, जो इंतजार करने और अपना काम करते रहने के लिए तैयार रहते हैं।” रावत के अलावा भाजपा की सूची में दूसरी महिला उम्मीदवार श्रुति गंगवार हैं। वह बरेली की अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की पूर्व अध्यक्ष और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। दो अन्य नामों ने भी कई लोगों को चौंकाया है।
इनमें कानपुर के वरिष्ठ पार्टी नेता गोपी कृष्ण पांडेय और उत्तर प्रदेश भाजपा में मौजूदा महासचिव राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं। सपा के कुछ नेताओं ने संकेत दिया कि भाजपा और उसके सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। इससे संकेत मिलता है कि यदि सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो उसकी जीत सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सेंध लगाने की योजना है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “उन्हें जो करना है, करने दीजिए। सपा के दो दर्जन से अधिक विधायक भी हमारे संपर्क में हैं।” उनके बयान से संकेत मिलता है कि दोनों में से कोई भी दल इन चुनाव को लेकर अपनी सतर्कता कम करने के लिए तैयार नहीं है। कई लोगों का मानना है कि ये चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति की दिशा भी तय करेंगे।