By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 06, 2026
लखनऊ, छह अक्टूबर उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आठ उम्मीदवारों ने मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल किया। इस बीच, विपक्षी समाजवादी पार्टी ने 16 अक्टूबर को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव में तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के संकेत दिए हैं। भाजपा के आठों उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के समक्ष नामांकन पत्र दाखिल किए।
हालांकि, ऐसी अटकलें थीं कि समाजवादी पार्टी मुकाबला कराने के लिए तीसरा उम्मीदवार उतार सकती है, लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस पर स्थिति स्पष्ट कर दी। यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।’’ यादव मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली में हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, ‘‘बात साफ है।
सपा ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार मान ली है।’’ मंगलवार को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन है। अगर अंतिम समय में कोई बदलाव नहीं हुआ तो सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है। भाजपा के सभी उम्मीदवार पहले विधानसभा के सामने स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे।
वहां उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और उत्साहपूर्ण माहौल के बीच वे नामांकन दाखिल करने के लिए रवाना हुए। भाजपा के आठ उम्मीदवारों में दो महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
इसके जरिए भाजपा ने जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन साधने का एक सुनियोजित प्रयास किया है। इससे संकेत मिलता है कि 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ये नाम काफी मंथन के बाद तय किए गए हैं। नामांकन दाखिल करने के बाद प्रकाश पाल ने कहा, ‘‘भाजपा के उम्मीदवारों का चयन दर्शाता है कि केवल भाजपा ही वास्तव में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का सम्मान करती है।
सपा का ‘पीडीए’ का विमर्श पूरी तरह फर्जी है और 2027 के विधानसभा चुनाव इसे साबित कर देंगे।