By एकता | Jul 05, 2026
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इन दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। अपने दो दिनों के दौरे के दौरान वे लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं और बड़े पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने का मंत्र दे रहे हैं।
दौरे के दूसरे दिन नितिन नवीन ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ चाय पर चर्चा की। इस बैठक में सभी ने अपने पुराने संगठनात्मक अनुभवों को साझा किया और आने वाले चुनाव में पार्टी को पहले से भी बड़ी जीत दिलाने की योजना पर विस्तार से बात की। बैठक शुरू होने से पहले भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उनका स्वागत किया।
भाजपा सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को और मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को ज्यादा सक्रिय करने और 2027 के चुनावी रोडमैप पर चर्चा की गई। हालांकि, वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय कटियार इस बैठक में शामिल नहीं हो सके।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के सालों के संगठनात्मक अनुभव और उनकी कार्यशैली से मिली सीख संगठन को और ज्यादा मजबूत व असरदार बनाने में मदद करेगी। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अगुवाई में हुई इस बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर चर्चा हुई। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अपने अच्छे कामों के दम पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2027 में लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगी।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की जनता गुंडाराज, माफियाराज, परिवारवाद और दंगों की राजनीति बिल्कुल नहीं चाहती, बल्कि वे विकास, अच्छा शासन और सुरक्षा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के रहने से ही प्रदेश समृद्ध होगा, जबकि सपा की सरकार आने पर अराजकता और जमीन कब्जाने के मामले बढ़ेंगे।
मौर्य ने दावा किया कि अगले 21 सालों तक समाजवादी पार्टी सत्ता से दूर रहेगी और देश व राज्य को 2047 तक विकसित बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सरकार और संगठन मिलकर 2017 जैसी बड़ी जीत को 2027 में भी दोहराएंगे। इस खास बैठक में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, भूपेंद्र सिंह चौधरी, स्वतंत्र देव सिंह, डॉ. रमापति राम त्रिपाठी और डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।