राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा बेहतर स्थिति में, सबकी निगाहें उसके उम्मीदवार पर

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 09, 2022

नयी दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही अब सबकी निगाहें इस पर है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देश के शीर्ष संवैधानिक पद के लिए किसे अपना उम्मीदवार बनाती है। शीर्ष संवैधानिक पद के लिए यदि विपक्षी दल अपना उममीदवार उतारते हैं और चुनाव होता है तो भाजपा अपने सहयोगियों के समर्थन से बेहतर स्थिति में नजर आ रही है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीख 18 जुलाई निर्धारित कीहै और यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होंगे तो फिर मतदान कराया जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव में किस गठबंधन का उम्मीदवार जीतेगा, इससे अधिक राजनीतिक विमर्श का विषय यह है कि सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी गठबंधन अपना उम्मीदवार किसे बनाते हैं। उत्तर प्रदेश सहित चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत ने पार्टी को और अच्छी स्थिति में ला दिया है। इनमें सबसे अहम उत्तर प्रदेश है क्योंकि यहां के हर विधायक के मत का मूल्य (वैल्यू) अन्य राज्यों के विधायकों की तुलना में सर्वाधिक है। वर्ष 2017 के राष्ट्रपति चुनाव के मुकाबले देखा जाए तो भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उसके सहयोगियों के विधायकों में संख्या में कमी आई है लेकिन उसके सांसदों की संख्या में वृद्धि जरूर हुई है। भाजपा के एक नेता ने कहा कि सत्ताधारी राजग के पास निर्वाचक मंडल के लगभग 50 प्रतिशत मत हैं। उनके मुताबिक राजग को आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस और ओडिशा के बीजू जनता दल (बीजद) जैसे गैर-राजग और गैर-संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (गैर-संप्रग) क्षेत्रीय दलों का साथ मिलने की उम्मीद है। 

इसे भी पढ़ें: भाजपा ने सुरजेवाला पर साधा निशाना, राज्यवर्धन राठौड़ ने पूछा, कांग्रेस को हिंदुओं से घृणा क्यों?

भाजपा यह मानकर चल रही है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सहयोगी रहे अन्नाद्रमुक का भी उसे समर्थन मिलेगा। पिछला राष्ट्रपति चुनाव 2017 में 17 जुलाई को हुआ था और मतगणना 20 जुलाई को हुई थी। रामनाथ कोविंद ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और विपक्षी दलों की उम्मीदवार मीरा कुमार को हराया था। कोविंद की उम्मीदवारी की घोषणा से पहले राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा जोरों पर थी लेकिन जब तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद उनके नाम की घोषणा की थी तो सभी आश्चर्य में पड़ गए थे। केंद्र में सत्ता में आने के बाद विभिन्न मौकों पर नेता के चयन में भाजपा नेतृत्व ने चौंकाने वाले फैसले किए हैं। राष्ट्रपति के रूप में कोविंद के चयन को कभी भी भाजपा के हिन्दुत्व के विमर्श को आगे बढ़ाने के रूप में नहीं देखा गया बल्कि उस वक्त उसे इस रूप में देखा गया था कि भाजपा ने समाज के एक वंचित व पिछड़े वर्ग के लोगों का दिल जीतने के एक महत्वाकांक्षी अभियान के तहत उनके नाम को आगे बढ़ाया था। इसके बाद हुए चुनावों में भाजपा को लगातार मिली सफलता भी यह दर्शाती है कि वह समाज के उन वर्गों की एक बड़ी संख्या को अपनी ओर करने में सफल भी रही है। 

प्रमुख खबरें

बोफोर्स कांडः एक झूठ के शापित होने का सच

Pressure में खेली गई वो पारी! David Miller के करियर का turning point, जानिए

Bhikaji Cama Death Anniversary: वो वीरांगना जिसने Germany में लहराया भारत का तिरंगा और British Rule को ललकारा

Sridevi Birth Anniversary: एक फिल्म के लिए 1 करोड़ चार्ज करने वाली Legend की Success Story और अनकहे किस्से