By अंकित सिंह | Oct 19, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य की विकास परियोजनाओं के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से मिले सहयोग को स्वीकार न करने पर हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार की आलोचना की। 4 अक्टूबर को दिए एक बयान में उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मौजूदा विकास काफी हद तक केंद्र से मिली बड़ी वित्तीय सहायता की वजह से संभव हुआ है, फिर भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसके लिए कोई आभार नहीं जताया है।
राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए, जयराम ठाकुर ने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि सरकार धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए 30 करोड़ रुपये, या रेलवे परियोजनाओं के लिए जरूरी 10 प्रतिशत फंड भी नहीं दे पा रही है। पिछले चार वर्षों में सड़कों की हालत पर उन्होंने कहा कि खराब बुनियादी ढांचे के बारे में सभी को पता है, और सड़कों का रखरखाव तथा सुधार केवल केंद्रीय फंड की मदद से ही संभव हो पाया है।
उन्होंने पूरे राज्य में बन रहे फोर-लेन सड़क नेटवर्क का जिक्र करते हुए कहा कि इससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों, दोनों के लिए परिवहन व्यवस्था बेहतर हुई है। दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ अपनी हालिया मुलाकात का जिक्र करते हुए, जयराम ठाकुर ने कहा कि मंत्री ने हिमाचल प्रदेश में सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को स्थानीय मुद्दों को तुरंत सुलझाने के निर्देश दिए।
उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण इलाकों में सड़क नेटवर्क में बड़े पैमाने पर सुधार केवल केंद्र सरकार की योजना 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' की बदौलत ही संभव हो पाया है। उन्होंने दावा किया कि जहां केंद्र सरकार जरूरी फंड मुहैया कराती है, वहीं मुख्यमंत्री का योगदान केवल आधारशिला रखने तक ही सीमित रहता है।दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ अपनी हालिया मुलाकात का जिक्र करते हुए, जयराम ठाकुर ने कहा कि मंत्री ने हिमाचल प्रदेश में सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को स्थानीय मुद्दों को तुरंत सुलझाने के निर्देश दिए। उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण इलाकों में सड़क नेटवर्क में बड़े पैमाने पर सुधार केवल केंद्र सरकार की योजना 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' की बदौलत ही संभव हो पाया है। उन्होंने दावा किया कि जहां केंद्र सरकार जरूरी फंड मुहैया कराती है, वहीं मुख्यमंत्री का योगदान केवल आधारशिला रखने तक ही सीमित रहता है।