By अंकित सिंह | Oct 08, 2026
गुरुवार को चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ INDIA गठबंधन का विरोध-प्रदर्शन तीसरे दिन में प्रवेश कर गया, जिसमें विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के सांसदों को पिछले दो दिनों से विरोध प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 300 सांसद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन आरोप है कि उनके लोगों के साथ मारपीट की गई। गांधी ने आगे कहा कि जिन्होंने "भारत पर कब्ज़ा" कर लिया है, उन्हें सज़ा दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस सच्चाई से निराश होकर, देश के 40 से ज़्यादा पूर्व जजों ने आज एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें बताया गया है कि कैसे कांग्रेस पार्टी देश के संवैधानिक तंत्र के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही है... अगर उन्हें लोकतंत्र के बारे में थोड़ी भी समझ है, तो उन्हें इसका जवाब देना चाहिए: जब कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हो, तो क्या उन्हें—राहुल गांधी को—कोर्ट पर भरोसा नहीं है? क्या उनका मामला इतना कमज़ोर है? या फिर वे सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन के ज़रिए कोर्ट पर दबाव बनाने और अविश्वास दिखाने की कोशिश कर रहे हैं? इससे पता चलता है कि पिछले तीन दिनों से राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध-प्रदर्शन की आड़ में गुंडागर्दी और अराजकता फैलाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।
धानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत एवं मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘‘आपराधिक साजिश’’ के तहत देश को ‘‘हाईजैक’’ करने का आरोप लगाते हुये लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि इन लोगों को न्याय के कटघरे में लाना हमारी गारंटी है। राहुल ने जोर देकर कहा, ‘‘इन लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और यह इंडिया गठबंधन की गारंटी है।’’ राजघाट की ओर विपक्षी नेताओं के मार्च से पहले राहुल गांधी ने कहा कि करीब 300 सांसद शांतिपूर्ण धरना देना चाहते हैं, लेकिन उन्हें प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के पहले दिन उन्हें निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास रोक दिया गया, जबकि दूसरे दिन जंतर-मंतर जाने से रोका गया और ‘‘हमारे लोगों को मारा गया।’’