By अजय कुमार | May 27, 2024
लखनऊ। पूर्वांचल में आजकल कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। राजनीति के गलियारों में सबसे अचंभित करने वाला एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है जहां बीजेपी विधायक रहे अवधेश राय जिनकी मुख्तार अंसारी ने दिन दहाड़े हत्या करा दी थी उसके बड़े भाई अफजाल अंसारी के साथ अवधेश राय के छोटे भाई और कांग्रेस नेता अजय राय एक ही गठबंधन के बैनर तले एक साथ खड़े हो गये हैं। लोग पूछ रहे हैं कि यह सियासत का कौन सा रंग है, जहां नेताओं के बीच सियासत में कब दोस्ती हो जाए और कब दुश्मनी कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन गाजीपुर संसदीय सीट पर पहले से चली आ रही अदावत सियासत पर भारी है। आइएनडीआइए घटक दलों की दो प्रमुख पार्टियां कांग्रेस और सपा ने प्रदेश स्तर पर हाथ तो मिला लिया है लेकिन जनपद में दिल नहीं मिल सका है।
पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय ने यहां जनसभा भी की, लेकिन सबकी नजर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर टिकी रहीं। क्योंकि अफजाल अंसारी के छोटे भाई मुख्तार अंसारी और अजय राय के बीच तीन दशक से दुश्मनी रही है। तीन अगस्त 1991 को अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की वाराणसी के लहुराबीर आवास के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में मुख्तार अंसारी का नाम सामने आया। इस मामले में पुलिस ने अवधेश राय हत्याकांड को आधार बनाकर गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज किया। अजय राय की कई बार गवाही हुई। हर तारीख पर वह मुख्तार अंसारी को सजा दिलाने के लिए डटे रहते थे। एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर में दस साल की सजा सुनाई थी। वहीं वाराणसी में भी अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अजीत कुमार कुशवाहा को करीब 20 हजार से भी कम वोट मिले थे। देखना यह है कि इस बार कांग्रेस का वोट सपा प्रत्याशी पर चढ़ता है या नहीं।