दिल्ली भाजपा का ये होगा आगे का प्लान, प्रवेश वर्मा और मनोज तिवारी को मिलेगा ये अहम पद !

By अनुराग गुप्ता | Jan 07, 2020

नयी दिल्ली। चुनाव आयोग ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है। जिसके बाद से राजनीतिक पार्टियां अपनी रणनीतियों को अमलाजामी पहनाने की कोशिशों में जुट गई हैं। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 'अच्छे बीते पांच साल, लगे रहो केजरीवाल' नारे के साथ चुनावी मैदान में चुके हैं तो भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने का मन बनाया है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के बाद से कांग्रेस की स्थिति डावांडोल नजर आ रही है।

भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 11 फरवरी को चुनाव नतीजे सामने आने के बाद अगर भाजपा को बहुमत मिलता है तो चांदनी चौक से सांसद डॉ. हर्षवर्धन के नाम पर पार्टी मुहर लगा सकती है। हालांकि इस बात की कोई भी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। जबकि ऐसा कहा जा रहा है कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ही दिल्ली का चुनाव लड़ेगी। क्योंकि हाल ही में भाजपा को विधानसभा चुनावों में काफी क्षति पहुंची है और यह पहला मौका है जब दिल्ली में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के भाजपा चुनाव लड़ने वाली है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगर डॉ. हर्षवर्धन मुख्यमंत्री बनते हैं तो चांदनी चौक सीट खाली हो जाएगी, जहां पर उपचुनाव होंगे। ऐसे में राज्यसभा सांसद विजय गोयल को चांदनी चौक सीट से लड़ाया जा सकता है। आपको बता दें कि विजय गोयल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने वाला है, और वह पूर्व में भी चांदनी चौक से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में अगर दिल्ली में भाजपा की सरकार बन जाती है तो फिर उन्हें चांदनी चौक की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाकर केंद्र में राज्यमंत्री का पद फिर से दिया जा सकता है।

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वहीं, मनोज तिवारी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है। ऐसे में सरकार बनती है तो उन्हें राज्यमंत्री का पद दिया जा सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री पद के नाम पर जब चर्चा शुरू हुई थी तो उस रेस में मनोज तिवारी भी शामिल थे और बाद में फिर सांसद प्रवेश वर्मा के नाम की भी अटकलें तेज हो गईं। प्रवेश वर्मा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। कहा जा रहा है कि प्रवेश वर्मा को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पार्टी को काफी समय से एक बड़े जाट नेता की कमी खल रही है। फिलहाल डॉ. हर्षवर्धन का नाम मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है।

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