पश्चिम बंगाल: राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवारों के चयन ने दिए नए राजनीतिक संकेत

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 10, 2026

कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व राज्यसभा सदस्यों सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक को पार्टी में शामिल करने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें पश्चिम बंगाल से होने वाले राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसे इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि सत्तारूढ़ पार्टी अब राज्य की राजनीति में विपक्ष के चुनिंदा नेताओं को अपने साथ जोड़कर और संगठन का विस्तार कर अपनी स्थिति को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इन नेताओं को शामिल किए जाने को एक असाधारण मामला बताया और कहा कि इससे पार्टी की पहले की नीति में कोई बदलाव नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा के दरवाजे भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तृणमूल नेताओं के लिए बंद हैं, लेकिन जिन्होंने भ्रष्टाचार या सत्ता के दुरुपयोग में हिस्सा नहीं लिया, उनका पार्टी में स्वागत है। इसके जरिए भाजपा ने विपक्षी नेताओं को संदेश दिया है कि राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नेताओं को पार्टी में सिर्फ जगह ही नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें सम्मानजनक पहचान भी दी जाएगी।

निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा की तीनों रिक्त सीटों के लिए अलग-अलग चुनाव होंगे और प्रत्येक सीट को स्वतंत्र चुनाव माना जाएगा। हालांकि तीनों उपचुनाव एक ही कार्यक्रम के तहत कराए जाएंगे। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 207 विधायक हैं, जिसके चलते पार्टी प्रत्येक सीट पर अपने दम पर जीत हासिल करने की मजबूत स्थिति में है। इसके विपरीत विपक्ष की स्थिति कमजोर है, और यदि ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट साथ आ भी जाएं, जिसकी संभावना कम है, तब भी उनके पास मिलाकर केवल 80 विधायक ही हैं।

चूंकि तीनों सीटों का चुनाव अलग-अलग कराया जा रहा है, इसलिए हर सीट पर जीत के लिए अलग-अलग बहुमत चाहिए। भाजपा के पास अपने दम पर पर्याप्त विधायक हैं, जबकि विपक्ष के पास किसी एक सीट के लिए भी पर्याप्त संख्या नहीं है। इसी कारण भाजपा पूरे आत्मविश्वास के साथ तृणमूल के तीनों पूर्व सांसदों को मैदान में उतार सकी। दूसरी ओर, विधानसभा चुनाव में हार के कुछ ही सप्ताह बाद तृणमूल के तीन वरिष्ठ सांसदों के पार्टी छोड़ने से यह धारणा बनी है कि तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक दबाव से गुजर रही है।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने कहा कि ये सीटें तृणमूल कांग्रेस की थीं और चुनाव के बाद पार्टी छोड़ने वालों का फैसला बंगाल की जनता करेगी, क्योंकि इतिहास गद्दारों के प्रति कभी उदार नहीं रहा। वहीं भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि विधानसभा चुनाव ने बंगाल की राजनीति की तस्वीर बदल दी है और जो अनुभवी व बेदाग नेता बंगाल के पुनर्निर्माण में योगदान देना चाहते हैं, उनके लिए भाजपा में जगह है। इस घटनाक्रम की तुलना ओडिशा से भी की जा रही है, जहां भाजपा ने बीजू जनता दल के पूर्व राज्यसभा सदस्यों को अपनी पार्टी में शामिल कर उपचुनाव के जरिए उन्हें फिर संसद पहुंचाया था।

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