By अभिनय आकाश | Jul 10, 2026
इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी चीज की हो रही है तो वो है केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के दफ्तर में हुए बड़े प्रशासनिक बदलाव की। पहले निजी सचिव अमर सिंह को हटाया गया। फिर आयुष शरण और शैलेश कुमार सिंह को भी उनके पदों से मुक्त कर दिया गया। ऐसे में सवाल यही है कि ऐसा क्या हुआ कि इतने बड़े स्तर पर एक साथ कार्रवाई करनी पड़ी। सरकार की तरफ से अभी तक इन अधिकारियों को हटाने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है। आदेश जारी हुए, अधिकारी हटाए गए लेकिन कारण सार्वजनिक नहीं किया गया। यही बात इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य ट्रांसफर से अलग बनाती है। राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में मंत्रालयों और मंत्रियों के दफ्तर की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा कर रही है। जिन अधिकारियों के कामकाज को लेकर सवाल है, या जिनकी कार्यशैली सरकार की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है उन पर एक्शन हो सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि तो नहीं है। लेकिन लगातार हो रहे बदलावों ने इन अटकलों को जरूर हवा दे दिया है। चर्चा ये भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद सरकार कुछ और बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक फैसले ले सकती है।
भूपेंद्र यादव एक पॉवरफुल मंत्री हैं और बीजेपी के नंबर 2 के नेता के बहुत करीबी माने जाते हैं। संगठन के अंदर बहुत अच्छी पकड़ है। राजनीतिक हलकों में दबी जुबान से ये भी कहा जा रहा है कि भूपेंद्र यादव का इस्तीफा भी हो सकता है। पीएम मोदी 12 जुलाई को अपने विदेश दौरे से लौट रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी ने साफ कहा कि हम एक गोल रखते हैं और उसके पूरा होते ही दूसरा बड़ा गोल रखते हैं। पीएम मोदी एक टारगेट ओरिएंटेंड लीडर हैं। वो टारगेट सेट करते हैं और उस टारगेट पर फिट नहीं बैठने पर 'पूरे घर को बदल डालो' वाली नीति अपनाते हैं। 12 जुलाई को एक बैठक होने वाली है। उसके बाद बड़े बड़े फैसले हो सकते हैं।
सूत्रों के हवाले से तो ये भी दावा किया जा रहा है कि राजनाथ सिंह को आगामी राष्ट्रपति के कार्यकाल समाप्त होने के बाद ये जिम्मेदारी दी जा सकती हैं। वहीं नितिन गडकरी के गवर्नर बनाए जाने की भी चर्चा है। इसके अलावा भी कैबिनेट में बड़े बदलाव हो सकते हैं। कैबिनेट में बदलाव तो एक हफ्ते पहले ही हो जाना था। लेकिन एनडीए की सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में जगह दिया जाना है और उसके लिए नेगोसिएशन का दौर चल रहा था। कौन सा विभाग किसके पास जाए इसको लेकर ये उस वक्त छोड़ा लंबा खिंच गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सप्ताह पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक और पहली ग्रीन फील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन किया। इस प्लांट का उद्घाटन पहले ही करना था। लेकिन जब प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बना तो वहां मालूम चला कि आग लग गई। सूत्रों के हवाले से बताया जाता है कि उस वक्त दो प्रशासनिक अधिकारयों के हटाए जाने को कहा गया था। लेकिन उस वक्त भी राजनस्थान की राजनीति को दिल्ली से चलाने वाले एक बड़े नेता ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इसके बाद पेड़ लगाने का कार्यक्रम रखा गया। सूत्रों के अनुसार पीएमओ की तरफ से कहा गया था कि वहां पर दो पेड़ की बातचीत चल रही थी और उस पेड़ में पीपल नहीं लगना था तो जो पेड़ लगाना था वो खेजड़ी का लगाना था। लेकिन हुआ इसका उल्टा।
पौधारोपण के बाद प्रधानमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से तस्वीरें साझा करते हुए लिखा गया कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है और उन्हें पचपदरा में 'खेजड़ी' का पौधा लगाने का सौभाग्य मिला है। इस पोस्ट के सामने आते ही आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को टैग करते हुए एक्स पर एक पोस्ट लिखी। बेनीवाल ने तंज कसते हुए सवाल किया मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से पूछना चाहता हूं कि आज आप राजस्थान के पचपदरा आए, वृक्षारोपण भी किया, क्या आपकी सरकार ने खेजड़ी की नई किस्म का आविष्कार किया है या फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी ने पीपल को खेजड़ी बताकर आपसे पौधारोपण करवा दिया ? हनुमान बेनीवाल की ओर से सोशल मीडिया पर यह दावा किए जाने के बाद कि लगाया गया पौधा खेजड़ी नहीं बल्कि पीपल का है, इंटरनेट पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया। इसके कुछ समय बाद ही प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से उस संबंधित पोस्ट और तस्वीरों को हटा दिया गया।
फिर यह पूछा गया कि जब खेजरी तय हुआ तो किसने बदला? कहा जाता है न कि जब वक्त उल्टा चलता है तो यही हो जाता है कि फिर एक के बाद एक गलतियां जो है वो सामने आने लगती है। प्लांट के अंदर पिछली बार भी बवाल मचा था। आग लगने की वजह से तो यही पूछा गया कि भाई फिर अब यह किसकी जिम्मेदारी है? फिर पेड़ वाला विवाद तो राजस्थान में भी कुछ बदलाव अगर देखने को मिल जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा।