BJP के केंद्रीय नेता दिनभर राज्यों में प्रचार करते हैं और शाम को दिल्ली में लोकसभा चुनावों में जीत की रणनीति पर काम करते हैं

By नीरज कुमार दुबे | Nov 03, 2023

देश में इस समय पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार जोरों पर चल रहा है। विपक्षी कांग्रेस का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा राज्यों में जीत हासिल कर बढ़त बनाई जाये। अन्य दल भी इन चुनावों में पूरी जोर आजमाइश कर रहे हैं। लेकिन सत्तारुढ़ भाजपा सिर्फ विधानसभा चुनावों पर ही नहीं बल्कि लोकसभा चुनावों पर भी पूरा ध्यान दे रही है। भाजपा के केंद्रीय नेता दिन में राज्यों में चुनाव प्रचार करते हैं तो शाम को दिल्ली में बैठकें कर लोकसभा चुनावों में जीत की रणनीति बनाते हैं। भाजपा की इन्हीं तैयारियों को देखते हुए ही एक दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि कांग्रेस का पूरा ध्यान विधानसभा चुनावों पर लगा हुआ है जिसके चलते इंडिया गठबंधन का कामकाज ठप पड़ा हुआ है।

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बताया जा रहा है कि बैठक में उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने की रणनीति पर चर्चा हुई और वहां प्रदेश संगठन को इस कार्य में और तेजी से जुटने के लिए निर्देश दिये गये। यह भी बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ सहयोगी दलों के नेताओं को अपने मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर भी आलाकमान से चर्चा की। बताया यह भी जा रहा है कि योगी सरकार से कुछ मंत्रियों को हटा कर उन्हें संगठन के काम पर लगाया जा सकता है।

बैठक में महाराष्ट्र को लेकर भी काफी लंबा मंथन हुआ। महाराष्ट्र सरकार को अभी कल ही तब राहत मिली जब मराठा आरक्षण आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित हो गया है। बताया जा रहा है कि बैठक में इस मुद्दे पर तो चर्चा हुई ही साथ ही गठबंधन में शामिल दलों के साथ सीट बंटवारे पर भी मंथन हुआ। दरअसल, महाराष्ट्र में एनसीपी के एक धड़े के भाजपा के साथ आने के बाद सीटों के बंटवारे का मुद्दा पेचीदा हो गया है क्योंकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भी लोकसभा चुनावों में अपने लिये उतनी ही सीटें मांग रही है जितनी 2019 में अविभाजित शिवसेना के हिस्से में आई थी। भाजपा भी ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटों पर लड़ना चाहती है लेकिन नये गठबंधन में अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के लिए भी कुछ सीटें छोड़नी ही पड़ेंगी। फिलहाल कोई पक्ष कम सीटों पर मानने के लिए राजी नहीं दिख रहा है।

बिहार के बारे में पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्य के नेताओं के साथ प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा की गयी और नीतीश सरकार की नाकामियों को जनता के बीच और प्रखरता के साथ ले जाने की रणनीति बनी। बिहार में जातिगत जनगणना मुद्दे तथा इंडिया गठबंधन के तहत सीटों के होने वाले संभावित बंटवारे से उत्पन्न होने वाली स्थिति पर भी चर्चा की गयी। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के तमाम वरिष्ठ नेता भी इस बैठक में सम्मिलित हुए। हम आपको याद दिला दें कि पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा ने मध्य प्रदेश में शानदार प्रदर्शन करते हुए 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस समय हो रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा ने कई सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को भी मैदान में उतारा हुआ है। मध्य प्रदेश में भाजपा का जोर राज्य में वापस सत्ता हासिल करने और लोकसभा चुनावों में अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने पर लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि बैठक में हरियाणा के नेताओं ने भी शिरकत की। गुरुवार दोपहर हरियाणा के करनाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं को सभी 10 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य दिया था। यह लक्ष्य कैसे साकार किया जा सकता है, इसके बारे में भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने राज्य इकाई के नेताओं से चर्चा कर रणनीति बनाई। तेलंगाना के नेताओं के साथ चर्चा के दौरान भाजपा नेताओं ने विधानसभा चुनावों में अपना प्रदर्शन सुधारने और लोकसभा चुनावों में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की रूपरेखा बनाई।

बहरहाल, हम आपको यह भी बता दें कि इस बैठक में शामिल हुए राज्यों- उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा में 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया था और तेलंगाना में भी अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में इन्हीं राज्यों पर भाजपा ने जिस तरह दोबारा से जोर लगाया है वह दर्शाता है कि भाजपा नये क्षेत्रों में जीत हासिल करने पर जोर तो दे रही है लेकिन वर्तमान में अपने पास मौजूद सीटों को भी किसी हालत में नहीं खोना चाहती।

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