संसद परिसर में सांसद का रक्त गिरना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं

By नीरज कुमार दुबे | Dec 19, 2024

अक्सर कुर्ते की बाहें चढ़ा कर विरोधी दलों पर हमला बोलने वाले राहुल गांधी ने आज जिस तरह संसद में भाजपा सांसदों के साथ बर्ताव किया वह लोकतंत्र के लिए काला अध्याय बन गया। संयोग देखिये कि यह सब तब हुआ जब हाल ही में संसद ने 'भारतीय संविधान के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा' पर चर्चा की। देखा जाये तो यह कांग्रेस का दोमुंहापन नहीं तो और क्या है कि एक ओर उसके सांसद जय भीम के नारे लगा कर प्रदर्शन कर रहे थे तो दूसरी ओर पार्टी के नेता संविधान और नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए गुंडागर्दी पर उतर रहे थे। बात-बात पर संविधान की प्रति दिखाने वाले राहुल गांधी को बताना चाहिए कि उसमें कहां लिखा है कि संसद में या संसद परिसर में हिंसा की जाये या किसी को धक्का दिया जाये? दिन-रात संविधान की प्रति दिखाने वाले राहुल गांधी को बताना चाहिए कि संविधान में कहां लिखा है कि महिला सांसद के साथ बदतमीजी की जाये?

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बहरहाल, आज की घटना यह भी दर्शाती है कि भविष्य में सांसदों को राहुल गांधी से सचेत रहने की जरूरत है। वैसे तो संसद में अब तक माइक तोड़ने, पर्चे फाड़ने या शोर मचाने जैसे वाकये सामने आते थे लेकिन अब जिस तरह धक्का मुक्की होने लगी है उसने भारत की संसदीय प्रणाली पर सवालिया निशान भी खड़ा कर दिया है। सोनिया गांधी चूंकि विपक्ष की नेता रही हैं इसलिए उन्हें अपने पुत्र को समझाना चाहिए कि मुद्दों का हल हिंसा से नहीं वार्ता और चर्चा से निकलेगा। निश्चित ही आज वायनाड और रायबरेली के मतदाता भी पश्चाताप कर रहे होंगे कि उन्होंने क्यों राहुल गांधी की बातों पर विश्वास करके उन्हें चुन लिया।

-नीरज कुमार दुबे 

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