मंडी बोर्ड अधिनियम में संशोधन का बोर्ड कर्मचारीयों ने किया विरोध, कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने भी जताया विरोध

By Dinesh shukla | Jun 01, 2020

भोपाल। मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड कर्मचारीयों के आह्वान पर कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन करने की मांग को लेकर प्रदेश के कालापीपल कृषि उपज मंडी के कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा काली पट्टी बांधकर विरोध करते हुए कामकाज किया गया। इस एक्ट में बड़े व्यापारियों निजी मंडी खोलने के छूट दी है। जिसके बाद उस व्यापारी पर मंडी प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। मंडी बोर्ड कर्मचारीयों के इस विरोध के दौरान कालापीपल से कांग्रेस के विधायक और मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल चौधरी भी किसानो के साथ विरोध दर्ज करते नज़र आये, उन्होंने भी काली पट्टी पहनकर इन संशोधन का का विरोध जताया।

विधायक कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पहले से सभी संस्थाओं का निजीकरण करने में लगी हुई थी और प्रदेश की बीजेपी सरकार मंडियों में निजीकरण करने जा रही है। जिससे साफ़ है कि इनकी मंशा चंद पूंजीपतियों और व्यापारियों को मददद पहुंचने की है। कुणाल चौधरी ने कहा कि मॉडल एक्ट में प्राइवेट मंडियों को लाइसेंस प्राप्त होगा जो बाहर अपनी मंडीया चलाएंगे, जिससे कृषि उपज मंडीयों के अधिकार क्षेत्र खत्म हो जाएंगे उन पर नियंत्रण भी मंडी समिति का नहीं रहेगा और न किसी प्रकार की कोई कार्यवाही की जा सकेगी साथ ही न ही किसानों की कोई मदद हो पाएगी। वर्तमान में किसी के साथ भी कोई समस्या होती है, तो मंडी समिति समस्या को तत्काल हल करने का प्रयास करती है, लेकिन जब मंडीयां प्रायवेट हो जाएंगी तो सबकुछ उनके अनुसार होगा। 

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विधायक चौधरी ने यह भी कहा कि जब बड़े व्यापारी एवं निजी कंपनी को स्वतंत्रता प्रशासन द्वारा दे दी गई तो इसमें जो फुटकर व्यापारी हैं उसका क्या होगा। क्योंकि इन निजी कंपनियों में मंडी प्रशासन किसी तरह का कोई हस्तक्षेप कर पाएगा इसकी क्या गारंटी है और वह निजी कंपनियों बड़े व्यापारी किसानों की उपज का सही दाम और सही तोल उपलब्ध करवाएंगे। प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। शासन द्वारा जो मंडी अधिनियम में संशोधन किया है। 

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