Aditya Dhar की Dhurandhar 2 की ऐतिहासिक जीत पर बॉलीवुड की 'खामोशी'! साउथ के दिग्गज कर रहे हैं हिंदी फिल्म का जयघोष?

By रेनू तिवारी | Apr 01, 2026

आदित्य धर के निर्देशन में बनी 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस पर ₹1,400 करोड़ का आंकड़ा पार कर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जो आज से पहले किसी भी हिंदी फिल्म के लिए मुमकिन नहीं था (बिना चीन के बाजार के)। लेकिन इस जबरदस्त कामयाबी के बीच एक सवाल पूरी फिल्म इंडस्ट्री में गूंज रहा है—बॉलीवुड अपने ही घर की इस सबसे बड़ी जीत पर खामोश क्यों है?

दिग्गजों की तारीफ: सुपरस्टार रजनीकांत ने आदित्य धर को 'बॉक्स ऑफिस का बाप' घोषित किया, तो एस.एस. राजामौली ने रणवीर सिंह की अदाकारी को 'एक्टिंग का बेहतरीन नमूना' बताया।

समर्थन की लहर: कमल हासन, राम चरण, अल्लू अर्जुन, महेश बाबू और नागार्जुन जैसे दिग्गजों ने सार्वजनिक तौर पर फिल्म की सराहना की है।

रिकॉर्ड तोड़ कमाई: ट्रेड एक्सपर्ट्स के अनुसार, दक्षिण के पांच राज्यों में फिल्म ने ₹200 करोड़ से ज्यादा की नेट कमाई की है, जो किसी भी शुद्ध बॉलीवुड टीम वाली फिल्म के लिए एक नया कीर्तिमान है।

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बॉलीवुड की 'ठंडी' प्रतिक्रिया: डर, जलन या विचारधारा?

फिल्म की इस सुनामी के बावजूद, हिंदी सिनेमा के 'ए-लिस्टर्स' की तरफ से बधाई संदेशों का अकाल पड़ा है।

मौन बड़े सितारे: शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान जैसे 'खान त्रयी' ने अब तक फिल्म पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि करण जौहर, अक्षय कुमार और आलिया भट्ट ने फिल्म की तारीफ की है, लेकिन इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा अभी भी 'सतर्क दूरी' बनाए हुए है।

इंडस्ट्री में एकता की कमी: फिल्ममेकर मधुर भंडारकर ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, "हमारी इंडस्ट्री में एकता की कमी है। जब कोई फिल्म इतना अच्छा करती है, तो उसका फायदा स्पॉट बॉय से लेकर टेक्नीशियन तक सबको होता है। हमें खुले दिल से तारीफ करनी चाहिए।"

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इस खामोशी के पीछे की असल वजह क्या है?

विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर इस चुप्पी के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:

वैचारिक मतभेद (Ideology): 'धुरंधर 2' पर वर्तमान सरकार और प्रधानमंत्री के महिमामंडन के आरोप लगे हैं। कुछ आलोचक इसे 'प्रोपेगैंडा' कह रहे हैं। बॉलीवुड का एक बड़ा हिस्सा अक्सर ऐसी विवादित बहस वाली फिल्मों पर टिप्पणी करने से बचता है।

असुरक्षा की भावना: राम गोपाल वर्मा ने इसे 'डर' और 'जलन' का नाम दिया है। उनका मानना है कि फिल्म की अकल्पनीय सफलता ने बॉलीवुड के पुराने समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।

बदला हुआ दौर: प्रियदर्शन ने इस फिल्म के प्रभाव की तुलना 'शोले' से की है। शायद बॉलीवुड का एक तबका अभी भी इस नए 'धुरंधर युग' को स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है।

निष्कर्ष: क्या खामोशी से कुछ साबित होगा?

सोशल मीडिया के दौर में, जहाँ छोटी-छोटी उपलब्धियों का जश्न मनाया जाता है, वहां ₹1,400 करोड़ की ब्लॉकबस्टर पर चुप्पी वाकई असामान्य है। दक्षिण भारतीय सितारों का इस फिल्म को अपनाना यह दर्शाता है कि अब सिनेमा की भाषा 'क्षेत्रीय' नहीं बल्कि 'कंटेंट' आधारित हो गई है। बॉलीवुड के बड़े सितारों की यह खामोशी उन्हें ही मुख्यधारा की जनता की पसंद से दूर कर सकती है।

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