By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 19, 2026
बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है लेकिन पुलिस की कार्रवाई पर व्यापक रोक लगाने का आदेश देने से पहले प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि और आम लोगों को होने वाली असुविधा जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को उन याचिकाओं पर जवाब देने का निर्देश दिया, जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ मुंबई में हाल में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लेने के आरोप लगाए गए हैं। अदालत अधिवक्ता सावर देवरे की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
इन लोगों को पिछले सप्ताह शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। सिंह ने कहा कि चारों को एक दिन हिरासत में रखा गया, फिर घर जाने को कहा गया और इसके बाद उन्हें उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने दो अन्य लोगों के हलफनामे भी पेश किए, जिन्हें पुलिस ने उनके घरों से हिरासत में लिया था।
पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि पर भी विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, ‘‘हर किसी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए।
महाराष्ट्र में हमने देखा है कि पुलिस ने काफी संयम बरता है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। निर्दोष नागरिकों की आड में अपराधियों को प्रदर्शनों में शामिल नहीं होना चाहिए।’’ इस बीच, मध्य मुंबई के शिवाजी पार्क के निवासियों की ओर से पेश दो वकीलों ने भी आवेदन दाखिल किए। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय का एक आदेश वहां इस तरह के प्रदर्शनों पर रोक लगाता है।
पिछले सप्ताह यहां प्रदर्शन हुए थे। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार को इन शिकायतों पर भी जवाब देना होगा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की।