Tarun Tejpal यौन उत्पीड़न मामला: Goa सरकार की अपील पर HC ने आदेश सुरक्षित रखा

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 30, 2026

मुंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पत्रकार तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। उच्च न्यायालय की गोवा पीठ की न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इन दलीलों में मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि क्या शिकायतकर्ता को ‘तहलका’ के पूर्व संपादक द्वारा भेजा गया ‘माफीनामा ईमेल’ अपराध स्वीकार करने जैसा है।

मेहता ने कहा कि शिकायतकर्ता एक पढ़ी-लिखी और स्वतंत्र महिला पत्रकार हैं, इसलिए कथित हमले के बावजूद वह अपनी पेशेवर ज़िम्मेदारियां निभाती रहीं; और उनके इस व्यवहार के आधार पर उनकी विश्वसनीयता पर शक नहीं किया जा सकता। शिकायतकर्ता के बयानों में कथित विसंगतियों पर बात करते हुए मेहता ने कहा कि गवाही में मामूली अंतर होना स्वाभाविक है और इससे गवाह की सच्चाई पर कोई असर नहीं पड़ता। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अधीनस्थ अदालत ने मुख्य आरोपों की निरंतरता की जांच करने के बजाय मामूली विसंगतियों पर गलत तरीके से भरोसा किया।

कथित घटना के बाद तेजपाल की ओर से शिकायतकर्ता को भेजे गए एक ईमेल का विस्तार से जिक्र करते हुए, मेहता ने कहा कि आरोपी ने अपनी “गलतफहमी” के लिए माफी मांगी थी, घटना को “बहुत दुखद” बताया था, शर्मिंदगी जाहिर की थी और कहा था कि उनका मानना ​​है कि यह मुलाकात दोनों की सहमति से हुई थी। मेहता ने कहा कि इन बयानों से यह बात मान ली गई कि घटना हुई थी, और ये बचाव पक्ष के इस रुख के उलट थे कि होटल की लिफ्ट के अंदर कोई घटना नहीं हुई थी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर कुछ हुआ ही नहीं होता, तो तेजपाल के माफी वाले ईमेल में बार-बार पछतावा या शर्म जाहिर करने या जिंदगी भर की सजा का जिक्र करने की कोई वजह नहीं होती।

तहलका के पूर्व प्रधान संपादक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने तेजपाल के माफी वाले ईमेल को यौन संबंध होने की स्वीकारोक्ति के रूप में गलत तरीके से पेश किया है। पोंडा ने कहा कि तेजपाल के किसी भी माफी वाले ईमेल में आपसी सहमति से हुए किसी शारीरिक या यौन संबंध को स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने दलील दी कि तेजपाल ने केवल आपसी सहमति से हुई यौन प्रकृति की बातचीत का जिक्र किया था, किसी शारीरिक कृत्य का नहीं।

तेजपाल की एक महिला सहयोगी ने उन पर आरोप लगाया था कि सात और आठ नवंबर, 2013 को गोवा में ‘तहलका’ पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान, होटल की लिफ्ट में उन्होंने उसका साथ यौन उत्पीड़न किया। गोवा के मापुसा की एक अदालत ने 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था जिसके बाद राज्य सरकार ने अपील दायर की।

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