TISS प्रोफेसर को WhatsApp ग्रुप बनाने पर जबरन रिटायरमेंट गलत, Bombay HC की कड़ी टिप्पणी

By अभिनय आकाश | Sep 18, 2026

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि किसी संस्था की मंज़ूरी के बिना सिर्फ़ WhatsApp ग्रुप शुरू करने पर ही अनिवार्य रिटायरमेंट जैसी सख़्त सज़ा नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब यह साबित न हुआ हो कि कर्मचारी को उस ग्रुप से कोई निजी आर्थिक फ़ायदा हुआ था। यह टिप्पणी 57 साल के स्वपन गराइन की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। गराइन ने मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज (TISS) में काम किया था और WhatsApp ग्रुप बनाने के कारण उन पर दंडात्मक कार्रवाई की गई थी। गराइन, जिन्होंने TISS के स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क में 31 साल तक प्रोफ़ेसर के तौर पर काम किया, उन्हें मार्च 2016 में सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद, सितंबर 2017 में संस्थान के डायरेक्टर और अनुशासनात्मक अधिकारी ने उन्हें अनिवार्य रिटायरमेंट की सज़ा दी।

इसे भी पढ़ें: Meta ने पेश किया नया AI Agent Muse, रोजमर्रा के कामों में करेगा मदद

संस्थान ने यह भी आरोप लगाया कि गारैन का उसके लोगो का इस्तेमाल करना उसके इंटेलेक्चुअल अधिकारों का उल्लंघन था। संस्थान ने उन पर अपनी सर्विस की शर्तों का उल्लंघन करते हुए संस्थान के संसाधनों, ज्ञान और जानकारी का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया, साथ ही यह भी कहा कि ऐसा इस्तेमाल एक आपराधिक अपराध है। हालांकि, WhatsApp ग्रुप में हुई बातचीत और तथ्यों की जांच करने के बाद, जस्टिस MS कार्निक और जस्टिस संदेश डी पाटिल की बेंच ने इतनी सख़्त सज़ा देने के आधार पर सवाल उठाए। बेंच ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि ग्रुप बनाने से TISS को असल में क्या नुकसान हुआ।

प्रमुख खबरें

Top 10 Breaking News 18 September 2026 | Election Commission decision on the TMC dispute | Nithari case prime accused Surendra Koli suicide | देश-विदेश से जुड़ी आज की मुख्य सुर्खियाँ यहां विस्तार से पढ़ें

BCCI AGM में Ajit Agarkar के भविष्य पर फैसला टला, पद पर संशय बरकरार

Houthis ने सऊदी को रॉकेट से दहलाया, इधर UAE प्रेसिडेंट ने मोदी को फोन मिलाया, जानें क्या कहा

TMC Election Symbol: ममता गुट को फुटबॉल खिलाड़ी और अरूप रॉय खेमे को मिला लिफाफा