Tarun Tejpal यौन उत्पीड़न मामले में Goa सरकार की अपील पर फैसला बृहस्पतिवार को सुनाएगा हाई कोर्ट

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 05, 2026

पणजी, पांच अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बृहस्पतिवार सुबह मौजूद रहने का निर्देश दिया है, क्योंकि अदालत 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की पीठ ने दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पिछले सप्ताह फैसला सुरक्षित रख लिया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बरी किए जाने के फैसले को रद्द करने की अनुरोध वाली राज्य सरकार की अपील पर दलीलें पेश की थीं, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने तेजपाल का पक्ष रखा था।

तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा। मेहता ने दलील दी कि सत्र अदालत ने यौन उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं के आधार पर शिकायतकर्ता के आचरण का आकलन कर गंभीर गलती की। सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता की प्रतिक्रिया को लेकर कोई सार्वभौमिक मानक नहीं हो सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की शिक्षा, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा था कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में मामूली विरोधाभासों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी, जबकि यह जांचना चाहिए था कि उसके मुख्य आरोपों में निरंतरता बनी रही या नहीं। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अभियोजन ने तेजपाल के माफी वाले ईमेल को यौन संबंध की स्वीकारोक्ति के रूप में गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कथित घटना से पहले और बाद में उसका व्यवहार, ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश और दस्तावेजी रिकॉर्ड अभियोजन के मामले के विपरीत हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि चलती लिफ्ट में शिकायतकर्ता को कैद रखे जाने का उसका बयान विशेषज्ञ साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज से मेल नहीं खाता।

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