By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 14, 2026
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर तेज छलांग लगाई है। सोमवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत कुछ समय के लिए 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी नरमी आई और खबर लिखे जाने तक ब्रेंट 107.22 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत 102.66 डॉलर प्रति बैरल रही।
बता दें कि सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के पश्चिमी तट से जोड़ती है। इस मार्ग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे तेल को फारस की खाड़ी के समुद्री रास्ते के अलावा दूसरे मार्ग से निर्यात करने में मदद मिलती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यनबू बंदरगाह में फिलहाल केवल पांच से सात दिनों के निर्यात के लिए पर्याप्त तेल बचा होने की जानकारी सामने आई है। इसी बीच यमन के हूती बल लाल सागर में अपना नियंत्रण लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों और तेल की आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ गया है।
हालांकि, बाजार के विशेषज्ञ अभी पूरी तरह निराश नहीं हैं। आईएनजी के वस्तु बाजार रणनीतिकारों ने कहा कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को हुए संभावित नुकसान की वास्तविक गंभीरता और यह कब तक बंद रह सकती है, इसे लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। उनके अनुसार, स्थिति तेजी से बदल रही है और होर्मुज स्ट्रेट से अब भी बड़ी मात्रा में तेल की आवाजाही जारी है।
आईएनजी के वॉरेन पैटरसन और ईवा मैन्टे ने अपने आकलन में वर्ष की अंतिम तिमाही के लिए ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान बरकरार रखा है। हालांकि, उनका यह अनुमान इस बात पर निर्भर करता है कि मौजूदा संकट कितना लंबा चलता है और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल की आवाजाही किस हद तक प्रभावित होती है।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसके जरिए दुनिया की बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो तेल की वैश्विक कीमतों में और तेजी आ सकती है। इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को लेकर एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान में बना रह सकता है और वहां के तेल को अपने कब्जे में रख सकता है। ट्रंप ने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका युद्ध से बाहर निकल सकता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर ईरान में भी रुकने का विकल्प मौजूद है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वेनेजुएला का तेल बेचकर अमेरिका को मिली रकम युद्ध की लागत से कई गुना अधिक रही है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में बहुत तेज गिरावट आ सकती है। हालांकि, शांति की संभावना फिलहाल साफ नहीं दिख रही है। ओमान में होने वाली प्रस्तावित बैठक भी रद्द कर दी गई है, जिससे कूटनीतिक समाधान को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।
ऐसे में कच्चे तेल का बाजार फिलहाल हमलों, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के नतीजों पर टिका हुआ है। आने वाले दिनों में पाइपलाइन की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेटसे तेल की आवाजाही ही कीमतों की दिशा तय करने वाले सबसे अहम कारक है।