By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 08, 2026
नयी दिल्ली/ जयपुर, सात अगस्त ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को व्यापार वित्त तक आसान पहुंच देने के लिए ‘इनवॉइस डिस्काउंट व्यवस्था’ की स्थापना को लेकर अध्ययन करने पर सहमति जताई है। यह फैसला ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वैश्विक स्तर पर एमएसएमई के लिए वित्त का अंतर लगभग 5.7 लाख करोड़ डॉलर आंका गया है, जो असंगठित उद्यमों को शामिल करने पर आठ लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाता है। सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने माना कि छोटे उद्यमों के सामने मुख्य समस्या व्यवहार्य व्यापार योजनाएं पेश न कर पाने की है, जिससे कड़े ऋण नियम, ऊंची ब्याज दरें, अधिक गारंटी की मांग और बाजार तक पहुंच में बाधाएं पैदा होती हैं।
इससे एमएसएमई अपनी प्राप्तियों को तुरंत नकदी में बदलकर कार्यशील पूंजी जुटा सकेंगे। इस व्यवस्था में एमएसएमई, बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान, बड़ी कंपनियां, बीमा और नियामक एजेंसियों की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई सहित कई देशों के मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हुए।
बयान के अनुसार, दस्तावेज में शामिल सभी बिंदुओं पर ब्रिक्स सदस्य देशों की सहमति है और जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया है।