By अभिनय आकाश | Jan 14, 2026
एक तरफ वाशिंगटन में भारत को आर्थिक तौर पर कुचलने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी। धमकियां दी जा रही थी। फाइलें लिखी जा रही थी और सबसे बड़ा हथियार था टेरिफ। पहले 25% का टेरिफ अमेरिका ने लगाया। फिर 25% का पेनल्टी लगाया रूस से तेल लेने पर और अब वो कह रहा है कि ईरान के साथ अगर कोई भी देश व्यापार करता है तो उस पर 500% का टेरिफ लगा दिया जाएगा। लेकिन उसी वक्त प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा दांव चला कि पूरा अमेरिका हिल गया। जिस ब्रिटेन ने कभी भारत पर राज किया था, आज वही ब्रिटेन भारत की ढाल बनकर खड़ा हो गया है और ट्रंप की टेरिफ वाली दीवार पूरी तरह चकनाचूर हो गई है।
जब डोनाल्ड ट्रंप दोबारा सत्ता में आए तो एक बात साफ थी कि अमेरिका फर्स्ट और बाकी सब बाद में। सबसे पहले निशाने पर आया भारत। वाशिंगटन से सीधा संदेश आया रूस से तेल खरीदोगे तो सजा मिलेगी। डिजिटल टैक्स नहीं हटाया तो सजा मिलेगी। रणनीतिक आजादी दिखाई तो सजा मिलेगी। 50% 100% नहीं सीधे 575% का टेरिफ। अमेरिका को भरोसा था कि भारत का आईटी सेक्टर घुटने पर आ जाएगा। टेक्सटाइल इंडस्ट्री बर्बाद हो जाएगी। किसान और एमएसएमई टूट जाएंगे। अमेरिकी मीडिया तक लिखने लगी इंडियास ग्रोथ स्टोरी इज ओवर। लेकिन वो भूल गए कि यह 2026 का भारत है।
जब अमेरिका धमकियां दे रहा था तब भारत पर्दे के पीछे सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक तैयार कर चुका था। एक ऐसा दांव जो अमेरिका के ब्रह्मास्त्रस को उसी के हाथ में बेकार बना देगा। असली कहानी शुरू होती है लंदन से। ब्रिटेन अपनी डूबती अर्थव्यवस्था बचाने के लिए भारत के दरवाजे पर पहुंच चुका है और भारत ने मौके को पहचाना। इंडिया यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी कि एफटीए। यह कोई साधारण समझौता नहीं। 21वीं सदी का सबसे बड़ा जियोइकोनॉमिक मास्टर स्ट्रोक है। अब जरा ध्यान से समझिए। इस एफटीए के तहत ब्रिटेन ने भारत के 99% उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी। मतलब भारतीय कपड़े, जूते, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स और मशीनरी, जीरो ड्यूटी, नो टैक्स। अब सोचिए जहां अमेरिका टैक्स बढ़ाकर भारतीय सामान को महंगा कर रहा था।