By रेनू तिवारी | Oct 31, 2026
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी उलटफेर की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं जनता दल (सेक्युलर) के सुप्रीमो एच डी देवेगौड़ा से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक के बाद येदियुरप्पा ने स्पष्ट संकेत दिए कि राज्य के आगामी चुनावों में कांग्रेस को मात देने के लिए भाजपा और जेडीएस को एक साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरना होगा।
येदियुरप्पा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘केवल भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर ही हम अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। उनका भी यही सुझाव था और मेरी भी यही राय है।’’ उन्होंने कहा कि देवेगौड़ा मौजूदा सरकार से नाखुश हैं। येदियुरप्पा ने कहा, सरकार को जल्द से जल्द बदला जाना चाहिए और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें मिलकर कड़ी मेहनत करनी चाहिए। उनका यही सुझाव था। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने करीब 30 मिनट तक इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। भाजपा-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर येदियुरप्पा ने कहा, नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और देवेगौड़ा साथ बैठकर चर्चा करने के बाद जो भी फैसला करेंगे, हम उसके लिए प्रतिबद्ध हैं।
राजनीतिक मायने और गठबंधन का असर
कर्नाटक के राजनीतिक परिदृश्य में बी एस येदियुरप्पा (लिंगायत समुदाय के सर्वमान्य नेता) और एच डी देवेगौड़ा (वोक्कालिगा समुदाय के प्रभावशाली नेता) का एक साथ आना एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक समीकरण का निर्माण करता है।
मजबूत वोट बैंक का एकीकरण: लिंगायत और वोक्कालिगा वोटों का यह संभावित ध्रुवीकरण कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
पुराने मैसूर क्षेत्र में पकड़: जेडीएस का प्रभाव मुख्य रूप से दक्षिण कर्नाटक (पुराने मैसूर क्षेत्र) में है, जहां भाजपा ऐतिहासिक रूप से अपेक्षाकृत कमजोर रही है। इस गठबंधन से भाजपा को उस क्षेत्र में सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
सशक्त विपक्ष का निर्माण: दोनों दलों के एक मंच पर आने से राज्य में विपक्ष की आवाज और अधिक मुखर होगी, जिससे आगामी स्थानीय और आम चुनावों में कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी जा सकेगी।
इस बैठक ने कर्नाटक की भावी राजनीति की दिशा तय कर दी है। अब सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली शीर्ष नेताओं की बैठक पर टिकी हैं, जहां इस गठबंधन के औपचारिक स्वरूप और चुनावी रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा।