बसपा-कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों से सपा गठबंधन को हो सकता है भारी नुकसान

By संजय सक्सेना | Feb 03, 2022

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिस तरह से गैर भाजपा दलों ने बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव लगाया है, उससे भाजपा की बल्ले-बल्ले होते दिख रही है। भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि जिस भी विधानसभा क्षेत्र में दो या तीन मुस्लिम प्रत्याशी होंगे, वहां भाजपा की राह आसान हो सकती है, भाजपा को जो नुकसान किसान आंदोलन के चलते जाट वोटरों की नाराजगी से हो रहा है, भाजपा को उसकी भरपाई मुस्लिम वोटों के बंटने से हो सकता है। राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि भले ही कोई दल यह दावा करें कि मुस्लिम वोट बैंक एक मुश्त उसके साथ है, लेकिन जो दूसरे दलों के मुस्लिम प्रत्याशी हैं वह अपनी पहचान के बल पर अच्छी खासी संख्या में मुस्लिम वोट तो काटेंगे ही। बस यहीं से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी तस्वीर बदल सकती है। पश्चिमी उतर प्रदेश में प्रथम चरण की 58 में से 11 विधानसभा सीटों पर दो और तीन विधानसभा क्षेत्रों में तीन-तीन मुस्लिम प्रत्याशी हैं। वहीं दूसरे चरण में आठ सीटों पर तीन-तीन और चार सीटों पर दो-दो मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में हैं।

दूसरे चरण के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही पहले-दूसरे चरण की कुल 113 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की तस्वीर भी साफ हो गई है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में 113 में से सर्वाधिक 91 सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया था। तब कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरी सपा को यहां से 17 सीटों पर जहां सफलता मिली थी। कांग्रेस की झोली में सिर्फ दो सीटें आईं थीं। बसपा भी दो और रालोद सिर्फ एक सीट पर सिमट कर रह गई थी। 

गौरतलब है कि सपा-रालोद गठबंधन ने जहां दोनों चरणों की 113 सीटों में से 32 पर ही मुस्लिम प्रत्याशी खड़े किए हैं, वहीं बसपा ने अंतिम समय तक प्रत्याशी बदलते हुए 39 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। कांग्रेस ने भी 28 मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव लगाया है। प्रदेश भर में सिर्फ 100 प्रत्याशी उतारने की बात कहने वाली एआईएमआईएम के भी मुस्लिम उम्मीदवारों से किसी तरह के चमत्कार की उम्मीद नहीं दिखती।

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जानकारों का कहना है कि प्रथम दो चरणों के अंतर्गत आने वाली बुढ़ाना, लोनी, मुरादनगर, शिकारपुर, चरथावल, आगरा उत्तर, मीरापुर, छपरौली, नकुड़, गंगोह, बढ़ापुर, चांदपुर, नूरपुर, नौगावां सादात, असमोली, गुन्नौर, नवाबगंज, सहसवान, शेखूपुर और तिलहर जैसी सीटों पर गठबंधन के सामने मुस्लिम प्रत्याशी उतारने से मुस्लिम समाज के ज्यादा वोट बसपा को ही मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दलितों में तकरीबन 55 प्रतिशत जाटव वोट का भी बड़ा हिस्सा मिलने से बसपा के इन सीटों पर फायदे में रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। उन सीटों पर भी गठबंधन को कम फायदा होता दिख रहा है जहां पर सपा ने मुस्लिम प्रत्याशी तो उतारे हैं लेकिन उसके साथ ही बसपा, अपना दल (एस) व कांग्रेस आदि के भी मुस्लिम उम्मीदवार हैं। ऐसी सीटों पर मुस्लिम मतों के बिखराव की संभावना जताई जा रही है। बेहट, थानाभवन, सिवालखास, मेरठ दक्षिण, धौलाना, बुलंदशहर, कोल, अलीगढ़ शहर, नजीबाबाद, धामपुर, कांठ, ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद नगर व ग्रामीण, कुंदरकी, स्वार, चमरव्वा, रामपुर, अमरोहा, संभल व मीरगंज आदि ऐसी ही सीटें मानी जा रही हैं। माना जा रहा है कि इन सीटों पर मुस्लिम मतों के बिखराव का सीधा फायदा भाजपा को हो सकता है।

- संजय सक्सेना

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