By अंकित सिंह | Feb 01, 2026
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया, जिसमें विनिर्माण, अवसंरचना और रोजगार सृजन को मजबूत प्रोत्साहन दिया गया है, सरल कर और सीमा शुल्क व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है, और सरकार के आधुनिकीकरण अभियान को सुधारों की एक्सप्रेस बताया गया है। बजट 2026 तीन 'कर्तव्यों' पर आधारित है - उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर विकास को गति देना, लोगों की क्षमता का निर्माण करना और 'सबका साथ, सबका विकास' की परिकल्पना के तहत समावेशी विकास सुनिश्चित करना।
संसद में अपने लगातार नौवें बजट में, सीतारमण ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच विकास को बनाए रखने के लिए बहुआयामी रणनीति पेश की, जिसमें घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार, अवसंरचना परियोजनाओं के जोखिम को कम करना, उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए भारत के युवाओं को कौशल प्रदान करना और करदाताओं और आयातकों के लिए अनुपालन को आसान बनाना शामिल है।
निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए लोकलुभावन योजनाओं से परहेज किया और ‘सुधार एक्सप्रेस’ को जारी रखने की घोषणा की। सीतारमण ने अपना लगातार रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करते हुए किसानों, युवाओं और छोटी कंपनियों पर विशेष ध्यान दने के साथ अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बुनियादी ढांचे पर जोर दिया और सुधारों का खाका पेश किया। उन्होंने विनिर्माण पर जोर देने के साथ पूंजीगत व्यय लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया जो चालू वित्त वर्ष के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये है।
वित्त मंत्री ने लगभग सवा घंटा के अपने बजट भाषण में सुधारों का खाका पेश करते हुए विकसित भारत के लिए बैंकों को तैयार करने को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी प्रस्ताव किया। उन्होंने वृद्धि के प्रमुख इंजन के रूप में एमएसएमई के महत्व को रेखांकित करते हुए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास कोष का प्रस्ताव रखा। इसका मकसद क्षेत्र में भविष्य के ‘चैंपियन’ तैयार करना और उद्योगों को प्रोत्साहन देना है। बजट का ताना-बाना तीन कर्तव्यों यानी आर्थिक वृद्धि को गति देने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और सबका साथ, सबका विकास के इर्द-गिर्द बुना गया है। बजट में किसानों की आय बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य से 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का विकास करने, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूती प्रदान करने तथा स्टार्टअप एवं महिलाओं की अगुवाई वाले समूह को मत्स्य कृषक उत्पादक संगठनों के साथ शामिल करते हुए बाजार से जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।
सीतारमण ने तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों में सहायता प्रदान कर उच्च मूल्य वाली खेतीबाड़ी पर जोर दिया। बजट में आयकर की दरों एवं संरचना के मोर्चे पर कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। इसमें राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 में 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा गया है जो चालू वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। इसमें कर्ज- जीडीपी अनुपात को 2026-27 में घटाकर 55.6 प्रतिशत पर लाने का प्रस्ताव है जो चालू वित्त वर्ष में 56.1 प्रतिशत है। बजट में आगामी वित्त वर्ष के लिए 53.5 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान है। शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है जबकि बाजार से उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना जतायी गयी है।