By संजय सक्सेना | Nov 21, 2024
उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी में किसको कितनी सीटें मिलेंगी,इसको लेकर तो चर्चा हो सकती है,परंतु उप चुनाव में जिस तरह का मतदान देखने को मिला उससे यही लगता है कि बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर हासिये पर ही खड़ी नजर आई। किसी भी सीट पर बसपा फाइट करती नहीं दिखी। बसपा सुप्रीमो मायावती के लिये लगता है अब आगे की राह आसान नहीं रह गई है। इसका मुख्य कारण यह भी है कि बसपा का कोर वोटर कहलाने वाले दलितों ने अब भाजपा-सपा के रूप में अपनी नहीं मंजिल चुन ली है।इसी वजह से कमोबेश सभी जगह बसपा मुख्य लड़ाई से गायब दिखी, जिसके चलते भाजपा और सपा सीधी लड़ाई में आ गए हैं। बसपा की तरह ही चन्द्रशेखर आजाद की आजाद पार्टी भी कोई गुल खिलाते नहीं दिखी है। कई सीटों पर दलित मतदाता मुख्य रूप से भाजपा-सपा के बीच बंटे हुए दिखाई दिए, जिसने बीजेपी-सपा के जीत के आकड़े को थोड़ा उलझा दिया है, जिसके पक्ष में दलित मतदाता ज्यादा जायेगें, परिणाम उसी के पक्ष में रहेगा। सबसे बड़ी बात यह रही कि मुरादाबाद की मुस्लिम बाहुल्य कुंदरकी में भाजपा मुस्लिम मतों में सेंध लगाते हुए दिखी, जिसे काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। उधर, कानपुर की सीसामऊ में सपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर होने को अनुमान है। यहां के करीब 5.0 मतदान केंद्रों में से आधे से ज्यादा में बसपा प्रत्याशी का बस्ता नहीं दिखा।
मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में कई जगह पुलिस और वोटरों के बीच नोकंझोंक होते दिखी। यहां मुकाबला बीजेपी समर्थित रालोद प्रत्याशी मिथलेश पाल और सपा प्रत्याशी सुम्बुल राना के बीच सिमटता हुआ नजर आया। बसपा और आसपा प्रत्याशियों के बीच तीसरे नंबर की लड़ाई दिखी। मुस्लिम मतों की अधिकता वाले गांव के मत प्रतिशत से नतीजे तय होने के आसार बन गए हैं।अति पिछड़ा वर्ग और जाट मतों की अधिकता वाले गांव में रालोद प्रत्याशी के पक्ष में रुझान नजर आया। भोकरहेड़ी, करहेड़ा, बेलड़ा समेत अन्य गांवों में रालोद प्रत्याशी के पक्ष में मतदाताओं की लामबंदी दिखी। मुस्लिम मतों की अधिवक्ता वाले ककरौली, सीकरी, मीरापुर, जटवाड़ा, जौली में सुबह मुस्लिम मतदाता सपा, बसपा और आसपा के बीच बंटते नजर आए। ककरौली में पथराव के बाद मुस्लिम मतों की लामबंदी सपा प्रत्याशी के समर्थन में अधिक दिखी। मीरापुर में अनुसूचित जाति के मतदाताओं में बिखराव नजर आया। युवाओं ने आसपा को तरजीह दी, जबकि अन्य मतदाताओं की पहली पसंद बसपा नजर आई। गुर्जरों के मतों के बंटवारे पर भी सबकी निगाह बनी हुई है।
प्रयागराज की फूलपुर विधानसभा उपचुनाव में करीब एक दर्जन प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे थे लेकिन, मुख्य मुकाबला भाजपा-सपा के बीच है। कुछ इलाकों में सपा भारी दिखाई दी तो कुछ में भाजपा। दलित वोटरों ने किसके पक्ष में मतदान किया, इस पर परिणाम तय होगा। उधर, अलीगढ़ की खैर सीट पर भी सपा और भाजपा प्रत्याशी के बीच सीधी टक्कर दिखी।