Byju's के संस्थापक रवींद्रन पर 1.07 अरब डॉलर का अमेरिकी भुगतान आदेश, कंपनी विवादों में घिरी

By Ankit Jaiswal | Nov 23, 2025

मुश्किलों में चल रहे बायजूस के संस्थापक बायजू रवींद्रन को अमेरिका की दिवालिया अदालत से एक और बड़ा झटका मिला है और इस आदेश के बाद मामला और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार डेलावेयर की एक अमेरिकी अदालत ने रवींद्रन को 1.07 बिलियन डॉलर से अधिक की रकम चुकाने का आदेश दिया है, जिसे लेकर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया है और कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे हैं।


बता दें कि यह आदेश उस मामले से जुड़ा है, जिसमें 2021 में लिए गए 1.2 बिलियन डॉलर के टर्म लोन का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर गलत तरीके से ट्रांसफर होने का आरोप है और उसी रकम को वापस लाने के लिए ऋणदाताओं ने कानूनी कदम उठाए थे। अदालत ने पाया है कि बायजूस की अमेरिकी इकाई से 2022 में लगभग 533 मिलियन डॉलर ट्रांसफर हुए थे और बाद में वह रकम वापस नहीं आई हैं। गौरतलब है कि अदालत ने एक अलग निवेश हिस्सेदारी से जुड़ी जानकारी में भी गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया है, जिसकी कीमत करीब 540 मिलियन डॉलर के आसपास बताई गई है।


मौजूदा केस में ऋणदाताओं ने दावा किया था कि रवींद्रन और उनकी टीम ने अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया, कई सुनवाइयों में हिस्सा नहीं लिया और दस्तावेज़ अधूरे व टालमटोल वाले दिए हैं। इसी आधार पर अदालत ने डिफॉल्ट जजमेंट जारी किया है, जिसकी सुनवाई 29 सितंबर को हुई थी और जिसके बाद यह आदेश 20 नवंबर को जारी हुआ हैं।


रवींद्रन की ओर से जारी बयान में उनके कानूनी सलाहकार ने कहा है कि अदालत ने पूरी जानकारी पर ध्यान नहीं दिया और बिना उनका पक्ष सुने यह आदेश दे दिया हैं। उनका कहना है कि ऋणदाताओं ने अदालत को गलत जानकारी दी और जिन पैसों को लेकर विवाद है, वे किसी निजी उपयोग में नहीं लाए गए बल्कि कंपनी थिंक एंड लर्न के संचालन में इस्तेमाल हुए हैं। उनका यह भी कहना है कि वे अब ग्लास ट्रस्ट और अन्य पक्षों के खिलाफ कई देशों में कम से कम 2.5 बिलियन डॉलर के नुकसान का दावा दायर करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसे 2025 के अंत तक दाखिल किया जा सकता है अगर कोई समझौता नहीं होता हैं।


गौरतलब है कि कुछ साल पहले तक बायजूस भारत की सबसे मूल्यवान स्टार्टअप कंपनी मानी जाती थी और इसकी वैल्यूएशन 22 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में कंपनी कई कानूनी विवादों, फंडिंग की कमी, बड़े पैमाने पर छंटनी और प्रबंधन विवादों का सामना कर रही हैं। निवेशक भी लगातार दबाव बना रहे हैं और उधारदाताओं की तरफ से कंपनी पर नियंत्रण को लेकर खींचतान जारी है, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।


अदालत ने अपने आदेश में यह भी लिखा है कि रवींद्रन के व्यवहार ने मामले को और जटिल बना दिया और उन्होंने पहले दिए गए जुर्माने, जिसमें प्रति दिन 10,000 डॉलर का दंड शामिल था, उसका पालन भी नहीं किया हैं। ऐसे में अदालत ने कहा है कि यह राहत असाधारण इसलिए है क्योंकि पूरा मामला बेहद असामान्य परिस्थितियों में सामने आया हैं।


अभी मामले में सभी पक्षों को सात दिन का समय दिया गया है ताकि वे इस आदेश पर अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया दर्ज कर सकें और इसके बाद आगे की सुनवाई तय होगी।

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