उत्तर प्रदेश के तीसरे चरण के चुनाव में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर

By अजय कुमार | Apr 20, 2019

उत्तर प्रदेश में 23 अप्रैल को तीसरे चरण का मतदान होगा। इस चरण में कुल दस सीटों पर 120 उम्मीदवार मैदान में है। सबसे कम फिरोजाबाद और सबसे अधिक उम्मीदवार बरेली में है। तीसरे चरण में मतदाताओं की कुल संख्या 1.76 करोड़ हैं जिनमें 95.5 लाख पुरूष, 80.9 लाख महिला और 938 तृतीय लिंग के मतदाता है। 18 से 19 वर्ष आयु वाले 298619 मतदाता है। 80 वर्ष से अधिक के मतदाताओं की संख्या 299871 है। दस निर्वाचन क्षेत्रों में 12128 मतदान केंद्र व 20110 मतदेय स्थापित है।

तीसरे चरण में सपा−बसपा गठबंधन की मजबूती के साथ परिवारिक रिश्तों की परख होगी। मायावती ने मैनपुरी में मुलायम के साथ मंच साझा करने के साथ उनके समर्थन में वोट मांगने की अपील करके यह जता दिया है कि उन्होंने पुरानी बातों पर राख डाल दी है। तीसरे चरण में जिन दिग्गजों के भाग्य का फैसला होना है उसमें सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार जयाप्रदा, वरूण गांधी, सपा के आजम खां, शफीकुर्रहमान व सपा से बगावत करके अपना अलग दल बनाकर मैदान में उतरे शिवपाल यादव प्रमुख उम्मीदवार हैं। सपा−बसपा गठबंधन और भाजपा के साथ कांग्रेस की कई सीटों पर दमदार दावेदारी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है।

1. रामपुर लोकसभा सीटः (कुल वोटर 16.68 लाख) पर मुकाबला बेहद दिलचस्प व कड़ा हैं सपा के पूर्व मंत्री के बीच नजर आ रही है। सीधी टक्कर पर सबकी निगाह लगी है। यहां से सपा उम्मीदवार आजम खां के भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा पर अमर्यादित हमलों ने चुनाव को इमोशनल बना दिया हैं। फिर भी सपा को भरोसा है कि बसपा के दलित वोटों के सहारे आजम खां की सांसद बनने की मुराद जरूर पूरी हो जाएगी लेकिन, मुस्लिम सियासत में हिस्सेदारी बरकरार रखने के लिए नवाब परिवार आड़े आता दिख रहा है। वह आजम को सांसद के रूप में कतई नहीं देखना चाहता है। कांग्रेस प्रत्याशी संजय कपूर के आगे सियासी वजूद का संकट है। 

मतदाता(लाख में)− मुस्लिम 7.50। जाट 10 हजार। एससी 3 लाख। सिख 70 हजार।

2. मैनपुरी लोकसभा क्षेत्रः (कुल वोटर 17.02 लाख) में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के सामने भाजपा ने गत चुनाव में हारे प्रेम शाक्य को प्रत्याशी बनाया हैं। कांग्रेस ने मुलायम सिंह को वाक ओवर दिया है। मुलायम सिंह प्रचार में अधिक समय नही दे पा रहे है। लेकिन, बसपा और मजबूत करता दिख रहा है। मैनपुरी में मुलायम−मायावती की संयुक्त रैली के बाद मुलायम की जीत की संभावनाओं में कोई खोट नहीं बाकी रह गई है।

मतदाता(लाख में)−यादव 4 लाख। शाक्य 3लाख। सवर्ण 3.80 लाख। 1.50 लाख एससी।

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3. फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्रः (कुल वोटर 17.40 लाख) यादव कुनबे की आंतरिक कलह का कुरूक्षेत्र बना है। परिवार से बागी हुए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए यहां भतीजे के सामने ताल ठोंक रहे हैं। सपा महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव अपने चाचा शिवपाल यादव के लिए चुनौती बने है। भाजपा ने गत चुनाव में हारे एसपी सिंह बघेल की जगह चंद्रसेन जादौन को प्रत्याशी बनाया है। अक्षय बनाम शिवपाल की लड़ाई से सुर्खियों में आये इस क्षेत्र में भाजपा की उम्मीद वोट बंटवारे पर टिकी है। 

मतदाता(लाख में)− ओबीसी 8.50 लाख। एससी 3.50 लाख। मुस्लिम 2 लाख। सवर्ण 4 लाख।

4. बरेली लोकसभा क्षेत्रः (कुल वोटर 17.76 लाख) में वर्ष 2009 को छोड़कर वर्ष 1989 से 2014 तक जीते केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के सामने अगली पारी की चुनौती है। सपा ने पूर्व विधायक भगवत शरण गंगवार को उतार उनकी मुश्किल बढ़ायी है। क्योंकि दोनों कुर्मी बिरादरी सें है। बसपा का समर्थन सपा के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है। कांग्रेस ने 2009 में संतोष गंगवार को करीब 9 हजार वोटों से हराने वाले प्रवीण सिंह ऐरन मुकाबले में ही भाजपा फिर संभावनाएं देख रही है।

मतदाता(लाख में)− सवर्ण 5 लाख। एससी 1.50 लाख। ओबीसी 6 लाख। मुस्लिम 5 लाख। अन्य 60 हजार।

5. पीलीभीत लोकसभा क्षेत्रः (कुल वोटर 17.47 लाख) में मेनका गांधी का पलड़ा भारी रहा है। 1996 से 2014 के बीच 2009 छोड़ मेनका गांधी ने रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल की थी। इस बार वरूण फिर मैदान में है। मेनका सुल्तानपुर वरूण की सीट से चुनाव लड़ रही हैं। सपा ने पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा को गठबंधन प्रत्याशी बनाकर उतारा है। कांग्रेस ने यह सीट अपना दल (कृष्णा पटेल) को दी लेकिन, सिबंल विवाद के चलते सुरेंद्र गुप्ता को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ना पड़ रहा है। 

मतदाता (लाख में)− मुस्लिम 4.50। एससी 3.50। ओबीसी 5.50। सवर्ण 4.00

6. मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्रः (कुल वोटर 19.41 लाख) में एक तिहाई से अधिक मुस्लिम वोटर है। वर्ष 1977 के बाद दो बार ही गैर मुस्लिम उम्मीदवार जीता है। 2014 में भाजपा का झंडा फहारने वाले कुंवर सर्वेश सिंह फिर से मैदान में है। सपा न गत चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे एसटी हसन को फिर उतारा है। कांग्रेस ने शायर इमरान प्रतापगढ़ी जैसे बड़े नाम को टिकट थमा कर क्रिकेटर व पूर्व सांसद अजहरूद्दीन जैसा दांव चला हैं।

मतदाता(लाख में)− मुस्लिम 8.80 । एससी 2.23। सैनी 1.49। 1.50 ठाकुर।

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7. संभल लोकसभा क्षेत्रः (कुल वोटर 18.13 लाख) में वोटों के समीकरण को देखते हुए सपा−बसपा गठबंधन भाजपा के लिए जटिल चुनौती हैं। भाजपा ने सांसद सत्यपाल सैनी के बदले पूर्व एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी को टिकट दिया है। इस सीट से मुलायम सिंह और रामगोपाल यादव भी सांसद रह चुके हैं। मोदी लहर के चलते गत चुनाव में भाजपा ने खाता खोला से लेकिन, सपा के श्फीकुर्रहमान से मामूली अंतर से जीत मिल सकी थी। शफीकुर्रहमान बसपा से गठबंधन के साथ फिर मैदान में है। कांग्रेस ने जेपी सिंह को टिकट दिया है। 

मतदाता(लाख में)− मुस्लिम 7.50। एससी 35 हजार। यादव 1.50। सैनी 90 हजार


8. एटा लोकसभा क्षेत्रः (कुल वोटर 16.07 लाख) पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गढ़ माना जाता है। उनके पुत्र और सांसद राजवीर सिंह को भाजपा ने फिर उम्मीदवार बनाया है। सपा ने दो बार सांसद रहे और गत चुनाव में हारे देवेंद्र यादव को मैदान में उतारा है। यादव बाहुल्य इस इलाके में कांग्रेस ने सीधे मैदान में न उतर कर यह सीट पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी को दी है।

मतदाता (लाख में)− लोधी राजपूत 2.60 लाख। यादव 2.30 लाख। मुस्लिम 1.42 लाख। शाक्य 2.10 लाख

9. बदायूं लोकसभा क्षेत्रः (कुल वोटर 18.81 लाख)में सपा की मुश्किलें कांग्रेस ने बढ़ाई है। यहां सांसद व मुलायम के भतीजे धर्मेन्द्र यादव के खिलाफ कभी यादव परिवार के निकट रहे पूर्व सांसद सलीम शेरबानी कांग्रेस के टिकट पर मजबूती से डटे है। बदायूं में मुकाबला रोचक इसलिए हो गया है, क्योंकि यहां भाजपा ने स्वामी प्रसाद मोर्या की पुत्री संघमित्रा मौर्य को मैदान में उतारा है।

मतदाता (लाख में)− पिछड़ा 9,20। 3,90 मुस्लिम। 5,60 सवर्ण। 3,80 अनुसूचित।

10. आंवला संसदीय सीटः (कुल वोटर 17.70 लाख) चौंकाने वाले फेसनों को लेकर चर्चा में रही है। वर्ष 2009 में मेनका गांधी से मामूली अंतर से हारने वाले धर्मेंद्र कश्यप पाला बदल कर भाजपा में आए और 2014 में 1.38 लाख वोटों से जीते। इस बार धर्मेंद के समाने सपा−बसपा गठबंधन ने बिजनौर निवासी रूचिवीरा को प्रत्याशी बनाया हैं वहीं, कांग्रेस ने तीन बार सांसद रहे सर्वराज सिंह को उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। 

मतदाता(लाख में)− सर्वण 4.32। एससी 3 लाख। ओबीसी 5 लाख। मुस्लिम मतदाता 4 लाख। अन्य 70 हजार

- अजय कुमार

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