By रेनू तिवारी | Jan 30, 2026
धनुष और कृति सैनन की फिल्म 'तेरे इश्क में' (Tere Ishk Mein) अब Netflix पर उपलब्ध है। फिल्म 23 जनवरी 2026 को नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होना शुरू हो गई है। यह फिल्म सिनेमाघरों में 28 नवंबर 2025 को रिलीज हुई थी और लगभग 8 हफ्तों के बाद ओटीटी (OTT) पर आई है। आनंद एल राय के निर्देशन में बनी फिल्म 'तेरे इश्क में' (Tere Ishk Mein) को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह था। 'रांझणा' की यादों को ताजा करने वाली इस फिल्म को लेकर फैंस काफी खुश थे कि एक बार फिर से सैयारा जैसी लव स्टोरी को धूल चलाने के लिए धनुष की 'तेरे इश्क में'आ रही है। फिल्म रिलीज हुई फैंस के दिल पर बुल्डोजर चलाते हुए निकल गयी। अगर आप धनुष के फैन है और थियटर में 'तेरे इश्क में' नहीं देख पाये हैं। तो नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं। आइये जानते हैं फिल्म की खासियत और कमजोर कड़ियां- पहले खासियत की बात करते हैं-
'रांझणा' (2013) के 10 साल बाद धनुष और आनंद एल राय एक साथ वापस आए हैं। इस जोड़ी ने पहले भी हमें कुंदन जैसा यादगार किरदार दिया है। धनुष की बेजोड़ एक्टिंग और आनंद एल राय का इमोशनल निर्देशन इस फिल्म को देखने की सबसे बड़ी वजह है।
यह फिल्म 'रांझणा' की दुनिया का विस्तार मानी जा रही है। भले ही यह सीक्वल न हो, लेकिन इसका मिजाज, इसकी रूह और प्यार का वही जुनून दर्शकों को फिर से उसी बनारसी गलियों और रूहानी अहसास में ले जाएगा।
जहाँ 'इश्क' और 'जुनून' की बात हो, वहां ए.आर. रहमान के संगीत के बिना बात अधूरी है। फिल्म का म्यूजिक पहले ही चार्टबस्टर साबित हो रहा है। रहमान की धुनें फिल्म की इमोशनल गहराई को कई गुना बढ़ा देती हैं।
यह फिल्म किसी साधारण लव स्टोरी जैसी नहीं है। 'तेरे इश्क में' प्यार के उस पागलपन और डार्क साइड को दिखाती है, जहाँ जुनून सीमाओं को लांघ जाता है। अगर आप इंटेंस लव स्टोरीज के शौकीन हैं, तो यह आपके लिए बेस्ट चॉइस है।
इस फिल्म के गाने और संवाद इरशाद कामिल ने लिखे हैं। 'रांझणा' और 'तमाशा' जैसी फिल्मों में उनकी लेखनी ने जादू किया था। इस फिल्म में भी उनके गहरे बोल कहानी को शब्दों के जरिए दर्शकों के दिल तक पहुँचाने का काम करते हैं।
कभी-कभी बहुत ज्यादा दार्शनिक या 'शायराना' संवाद फिल्म की गति को धीमा कर देते हैं। यदि फिल्म की रफ़्तार (Pacing) धीमी रही और संवाद बहुत ज्यादा नाटकीय हुए, तो आज की पीढ़ी के दर्शकों के लिए फिल्म के साथ तालमेल बिठाना मुश्किल हो सकता है।
आज के समय में दर्शक 'जुनूनी प्यार' और 'पीछा करने' (Stalking) जैसे विषयों को लेकर काफी जागरूक हैं। यदि फिल्म में प्यार के नाम पर हिंसा या अत्यधिक पागलपन दिखाया जाता है, तो एक बड़ा वर्ग इसे 'टॉक्सिक' मानकर इसकी आलोचना कर सकता है (जैसा कि 'कबीर सिंह' के समय हुआ था)।
फिल्म के नेटफ्लिक्स पर आने के बाद एक विशेष सीन को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और मीम्स बन रहे हैं। फिल्म में कृति सैनन का किरदार (मुक्ति बेनीवाल) एक मनोविज्ञान की छात्रा है, जो दावा करती है कि उसने 2,200 पन्नों की पीएचडी थीसिस जमा की है। इस बात को लेकर पीएचडी स्कॉलर्स और यूजर्स फिल्म की 'लॉजिक' का काफी मजाक उड़ा रहे हैं।
क्लाइमेक्स केवल प्यार के बारे में नहीं है, बल्कि यह पागलपन, पछतावे और बलिदान का एक जटिल मिश्रण है। फिल्म का अंत यह सवाल छोड़ जाता है कि क्या प्यार में इस हद तक जाना सही है? कुछ दर्शकों को यह बहुत गहरा लग रहा है, तो कुछ इसे 'टॉक्सिक' भी कह रहे हैं।