By नीरज कुमार दुबे | Mar 21, 2025
दिल्ली उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले में भारत के प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कड़ी कार्रवाई की है। हम आपको बता दें कि जज के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की खबर सुनते ही प्रधान न्यायाधीश ने तत्काल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई और निर्णय लिया गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली उच्च न्यायालय से वापस इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेज दिया जायेगा। हम आपको बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद उच्च न्यायालय से ही दिल्ली लाये गये थे।
जस्टिस वर्मा ने अभी तक नकदी की बरामदगी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हम आपको बता दें कि 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार, गलत काम और न्यायिक अनियमितता के आरोपों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित किए थे। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिकायत मिलने पर मुख्य न्यायाधीश सबसे पहले संबंधित न्यायाधीश से जवाब मांगेंगे। अगर वह जवाब से असंतुष्ट हैं या उन्हें लगता है कि मामले में आगे जांच की जरूरत है, तो वह एक आंतरिक समिति का गठन करेंगे। इस समिति में एक सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और दो उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे। समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद यदि मुख्य न्यायाधीश की राय में कथित कदाचार गंभीर प्रकृति का है जिसके लिए उसे हटाया जाना आवश्यक है, तो वह न्यायाधीश से इस्तीफा देने के लिए कहेंगे। यदि न्यायाधीश इस्तीफा देने से इंकार करते हैं, तो मुख्य न्यायाधीश संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत संसद द्वारा उन्हें हटाने के लिए कार्यवाही शुरू करने के लिए सरकार को लिखेंगे।