बिहार के चुनाव में जाति है की जाती नहीं

By अभिनय आकाश | Apr 02, 2019

सियासी दंगल में सामने वाले को किस दांव से चित किया जाए इसी जुगत में राजनीतिक पार्टियां लगी रहती है। इसके लिए चाहें भाई को भाई से या जाति को जाति से लड़ाना ही क्यों न पड़े। बिहार में जाति हमेशा से ही एक अहम फैक्टर रही है। इस बार राजग और महागठबंधन ने इसी लाइन पर प्रदेश की 40 लोकसभा सीटों में से 14 सीटों पर एक ही जाति के उम्मीदवारों को आमने-सामने करके जातियों में अंदरूनी संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी है। वैसे तो जाति के खिलाफ दूसरी जाति का उम्मीदवार उतारकर समीकरणों को अपने पक्ष में करने की कवायदें तो होती आई हैं पर इस बार का नजारा ज्यादा दिलचस्प है।

पाटलिपुत्र से पिछले बार भाजपा को जीत दिलाने वाले रामकृपाल यादव इस बार भी लालू प्रसाद यादव की पुत्री मीसा भारती का मुकाबला करेंगे। पटना साहिब से भाजपा के रविशंकर प्रसाद का सामना इस बार कांग्रेस से संभावित उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा से होगा दोनों ही कायस्थ जाति से आते हैं। गया की सुरक्षित सीट से बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री व हम प्रमुख जीतन राम मांझी और जदयू प्रत्याशी विजय कुमार मांझी आमने-सामने होंगे। बेगुसराय सीट पर नवादा से शिफ्ट किए गिरिराज सिंह का सामना भाकपा के कन्हैया कुमार से होगा दोनों ही भूमिहार जाति के हैं। 

कई सीटों पर दिलचस्प रहेगा जातिगत मुकाबला

बिहार में अधिकांश सीटों पर महागठबंधन और भाजपा-जदयू नीत राजग के बीच सीधी टक्कर है। बात अगर भागलपुर लोकसभा सीट की करें तो राजद ने यहां बुलो मंडल को प्रत्याशी बनाया है। वहीं जदयू ने अजय कुमार मंडल पर भरोसा जताया है। दोनों ही प्रत्याशी एक ही जाति से आते हैं। इसी तरह गोपालगंज सुरक्षित सीट से राजद से सुरेन्द्र राम उर्फ महंत और मुकाबले में खड़े जदयू से डॉ आलोक कुमार सुमन एक ही जाति से हैं। यादवों के लिए सबसे मुफीद सीट माने जाने वाले मधेपुरा से महागठबंधन प्रत्याशी राजद के शरद यादव का मुकाबला जदयू के दिनेश चंद्र यादव चुनावी मैदान में हैं। वैशाली से महागठबंधन से राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह और लोजपा की वीणा सिंह तो महाराजगंज से भाजपा के जनार्दन सिंह सीग्रीवाल और राजद से रणधीर सिंह एक ही सामाजिक समीकरण के उम्मीदवार मैदान में हैं।

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मुंगेर से जल संसाधन मंत्री जदयू प्रत्याशी राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तो कांग्रेस की संभावित प्रत्याशी नीलम देवी की जाति समान है। जबकि काराकाट से जदयू ने महाबली सिंह को उतारा है अगर रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा यहां से चुनावी मैदान में आए तो दोनों एक ही समाज के होंगे। इसी तरह मुजफ्फरपुर से भाजपा के अजय निषाद और वीआईपी से राजभूषण चौधरी एक ही जाति के प्रत्याशी हैं। किशनगंज से कांग्रेस के मो. जावेद और जदयू के महमूद अशरफ, दोनों अल्पसंख्यक हैं। 

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ऐसे में विकास के दावों पर चुनाव लड़ने का की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियां टिकट देने के समय जातिगत समीकरण पर ही ज्यादा भरोसा दिखाती है। जिसकी जितनी आबादी उसी जाति के नेता की होती है उम्मीदवारी।

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