Manipur Video की जांच करेगी CBI, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से की अपील, राज्य के बाहर सुनवाई की मांग

By रेनू तिवारी | Jul 28, 2023

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) मणिपुर में भीड़ द्वारा दो महिलाओं को नग्न घुमाने के वायरल वीडियो की जांच अपने हाथ में लेगी। सरकार ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति उसकी "शून्य-सहिष्णुता की नीति" है और सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि मुकदमा मणिपुर के बाहर आयोजित करने का निर्देश दिया जाए।

हलफनामे के अनुसार, मणिपुर सरकार ने 26 मई को जांच को सीबीआई को स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी, और एमएचए ने सिफारिश को मंजूरी दे दी और गुरुवार, 27 जुलाई को इसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव को भेज दिया।

गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि मुकदमा मणिपुर राज्य के बाहर आयोजित किया जाए। इसने शीर्ष अदालत से एक आदेश पारित करने के लिए भी कहा जिसमें सीबीआई को आरोपपत्र दाखिल करने की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर मुकदमा समाप्त करने का निर्देश दिया जाए।

इसे भी पढ़ें: Manipur issue का समाधान होगा, भाजपा त्रिपुरा के जनजातीय इलाके में अपनी पैठ बना रही : माणिक साहा

बार-बार होने वाले अत्याचारों से बचने के उपाय

इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने कई "निवारक उपायों" का उल्लेख किया जो मणिपुर में घटना की पुनरावृत्ति से बचने के लिए किए गए हैं। इन उपायों में ऐसी घटनाओं की अनिवार्य रिपोर्टिंग, पुलिस अधीक्षक (एसपी) रैंक के अधिकारियों के नेतृत्व में जांच, और ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने और जानकारी प्रदान करने के लिए उचित पुरस्कार की पेशकश करना शामिल है जिससे अपराधियों की गिरफ्तारी हो सके। गृह मंत्रालय ने कहा कि व्हिसलब्लोअर या शिकायतकर्ता की पहचान पुलिस द्वारा सुरक्षित रखी जाएगी।

इसे भी पढ़ें: 'मणिपुर पर क्यों नहीं बोल रहे PM', राहुल गांधी का आरोप- सिर्फ सत्ता चाहती है BJP, इसके लिए देश भी जला देगी

हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को जारी हिंसा के पीड़ितों के लिए राज्य सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे पुनर्वास उपायों की भी जानकारी दी गई। इनमें प्रशिक्षित पेशेवरों द्वारा परामर्श देना, गोपनीयता और सुरक्षा के साथ चुने हुए स्थान पर आश्रय प्रदान करना, यदि पीड़ित आगे बढ़ना चाहते हैं तो शिक्षा की व्यवस्था करना, सार्थक आजीविका में सहायता करना, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए उपयुक्त नौकरी के अवसर प्रदान करना शामिल है। उनकी इच्छा और उपयुक्तता के आधार पर।

हलफनामे में कहा गया है कि राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को हिंसा के बाद निपटने में मदद करने के लिए "जिला मनोवैज्ञानिक सहायता टीमों" के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी प्रदान की जाएगी।

गृह मंत्रालय ने कहा कि 3 मई को हिंसा भड़कने के बाद से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की अतिरिक्त कंपनियों को मणिपुर में तैनात किया गया है। वर्तमान में, स्थानीय पुलिस के साथ सीएपीएफ की 124 अतिरिक्त कंपनियां और सेना/असम राइफल्स की 185 टुकड़ियां मणिपुर में तैनात हैं। सुरक्षा सलाहकार की अध्यक्षता में सभी सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक "एकीकृत कमान" भी स्थापित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार, 28 जुलाई को मामले की सुनवाई करेगा और गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तावों पर विचार करेगा।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को वायरल वीडियो पर स्वत: संज्ञान लिया था और इसे "बेहद परेशान करने वाला" बताया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने सरकार को घटना में शामिल लोगों को पकड़ने और आगे की हिंसा को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

प्रमुख खबरें

Kirit Somaiya मुंबई एयरपोर्ट के पास मस्जिद हटाने की मांग पर निकालेंगे हथौड़ा रैली

Ayodhya Deepotsav 2024: सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य तय

PM Modi और Donald Tusk की बैठक, 2030 तक व्यापार दोगुना करने पर बनी सहमति

Pushkar Singh Dhami ने Rekha Arya विवाद पर कहा शादी के 22 साल बाद आरोप क्यों निष्पक्ष जांच जरूरी