होली पर आयोजन (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Mar 03, 2026

होली के अवसर पर मुझे भगवान के ऐसे कीर्तन में शामिल होना बहुत अच्छा लगता है जिसमें प्रसिद्ध हिट फिल्मी धुनों पर ठुमकते, कीर्तन मंडली के सजे धजे नायक ‘कृष्ण’ बांसुरी मुंह से छुआए क्रम से सबके पास आकर फूलों से बना रंग लगाते हैं और भेंट में नकद रुपए लेकर उठते हैं और पुनः नर्तन करने लगते हैं। ऐसे कार्यक्रम से व्यक्ति धार्मिक, आध्यात्मिक, उत्सवधर्मी  हृदय महसूस करता है। मन बहुत अधिक भावना विभोर हो उठता है। आभास होने लगता है, होली पर अगर भगवान् कृष्ण किसी रूप में आ जाएं तो छोटा सा कार्यक्रम भी महा प्रसिद्ध आयोजन में बदल सकता है।

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हमारे एक पुराने दोस्त बांसुरी बजाते और आजकल डीजे भी चलाते हैं उन्होंने हमें फोन कर अधिकार से कहा, प्यारे धर्म का काम कर रहा है, चिंता न करो बांसुरी भी बजा देंगे और डीजे पर भक्तों को नचा भी देंगे। हमें लगा क्या मैं ऐसा धार्मिक जुलूस जैसा कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा हूँ जिसमें युवा विद्यार्थियों को भांग का घोटा पिलाकर, दो केले खिलाकर, डीजे की धुन पर फिल्मी धुन वाले भजनों पर सड़क पर कई घंटे नचाया जा सकता है। कुछ शुभचिंतकों  ने सलाह दी कि किसी की व्यवसायिक सेवाएं ली जाएं तो आयोजन का रंग निखर उठेगा और भगवान अति प्रसन्न हो जाएंगे। खूब सारी आमदनी होनी भी सुनिश्चित होगी। हमारे मन और तन से टेसू के फूल, केवड़े की मादक सुगंध, कोयल की कूक, आम के बौर और पुरानी गोपियां भी बाहर आने लगे थे। 

एक ख़ास बात, उस रात जब कृष्ण स्वप्न में आए तो वे आकर्षक स्वप्निल वस्त्रों में रहे लेकिन बांसुरी नहीं बजा रहे थे। उनके पांव के नीचे घास हरी मुलायम न होकर उदासी के रंग में लिपटी थी जिसमें तीखे कांटे भी थे। उनमें से कुछ कांटे उनके पांवों को घायल कर चुके थे और कुछ कांटे उनके हृदय की तरफ बढ़ रहे थे, उनकी पसंदीदा दर्जनों गाएं उनसे दूर मुंह छिपाए खड़ी थी। खास बात यह कि उनके सिर से मोर का पंख गायब था। हमने जैसे ही उनसे बात करने का निवेदन किया, ख्वाब बिखर गया।

सुबह होने पर इससे पहले कि पत्नी को स्वप्न बारे बताते उन्होंने खुश होकर बताया, इस बार महा सामाजिक क्लब वालों ने एआई द्वारा निर्मित गोपियों और कृष्ण का भव्य रास कार्यक्रम आयोजित किया है। टिकट ऑनलाइन मिल रहे हैं, मैंने रात को ही बुक कर लिए हैं। उसी शो में प्रसिद्ध बांसुरी वादक ‘राग चैन’ प्रस्तुत करेंगे और वास्तविक रंगों से होली भी खेली जाएगी ताकि परम्परा जारी रहे। ऐसे आध्यात्मिक आयोजन में जाने से कौन इनकार कर सकता था।   

- संतोष उत्सुक

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