केंद्र सरकार के उपक्रम बन रहे कमाऊ पूत

By प्रह्लाद सबनानी | Jun 13, 2025

आज से एक दशक से अधिक समय पूर्व तक केंद्र सरकार के उपक्रमों को चलायमान बनाए रखने के लिए केंद्रीय बजट में भारी भरकम राशि का प्रावधान करना पड़ता था तथा इन उपक्रमों को केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। परंतु, आज स्थिति एकदम बदल गई है एवं अब केंद्र सरकार के उपक्रम केंद्र सरकार को लाभांश के रूप में भारी भरकम राशि प्रदान कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार के विभिन्न उपक्रमों ने 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का लाभ अर्जित किया है। 

वित्तीय वर्ष 2024 में केंद्र सरकार के विभिन्न उपक्रमों ने 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का लाभ अर्जित किया है। प्रथम स्थान पर भारतीय स्टेट बैंक है, जिसने 67,085 करोड़ रुपए का लाभ अर्जित किया है। इसके बाद ओएनजीसी ने 49,221 करोड़ रुपए, आईओसी ने 41,730 करोड़ रुपए, भारतीय जीवन बीमा निगम ने 40,916 करोड़ रुपए, भारतीय कोयला निगम ने 37,402 करोड़ रुपए, बीपीसीएल ने 26,859 करोड़ रुपए, एनटीपीसी ने 20,812 करोड़ रुपए, बैंक आफ बड़ोदा ने 18,767 करोड़ रुपए, हिन्दुस्तान पेट्रोलीयम ने 16,015 करोड़ रुपए एवं पावर फाइनैन्स करपोरेशन ने 15,889 करोड़ रुपए की राशि का लाभ अर्जित किया है। इसके अतिरिक्त, पावर ग्रिड, कनारा बैंक, आरईसी लिमिटेड एवं यूनियन बैंक, ने 10,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का लाभ अर्जित किया है। साथ ही, गैस अथॉरिटी इंडिया लिमिटेड, पंजाब नेशनल बैंक, इंडीयन बैंक, जैसे केंद्र सरकार के 42 अन्य उपक्रमों ने भी भारी भरकम राशि का लाभ अर्जित किया है।

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केंद्र सरकार के उपक्रमों के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक, जो भारत में एक स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करता है एवं इस पर केंद्र सरकार का नियंत्रण लगभग नहीं के बराबर रहता है, ने भी पूरे विश्व के कई बड़े केंद्रीय बैंकों के बीच सबसे अधिक राशि का लाभ अर्जित किया है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व को वर्ष 2024 में 7,700 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है, इसी प्रकार ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक आफ इंग्लैंड को 4,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुक्सान हुआ है तथा यूरोपीयन यूनियन के केंद्रीय बैंक, ईसीबी को 900 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुक्सान हुआ है। वहीं, इन केंद्रीय बैंकों की तुलना में भारतीय रिजर्व बैंक को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3,100 करोड़ अमेरिकी डॉलर का लाभ हुआ है। जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को इस वर्ष 2.70 लाख करोड़ रुपए की राशि का लाभांश अदा करने की घोषणा की है। विभिन्न केंद्र सरकार के उपक्रमों ने भी इस वर्ष केंद्र सरकार को भारी भरकम राशि का लाभांश अदा किया है। भारतीय रिजर्व बैंक एवं केंद्र सरकार के उपक्रमों से प्राप्त होने वाली कुल लाभांश की राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट में किए गए प्रावधान की राशि से कहीं अधिक है।

इसी प्रकार, केंद्र सरकार को प्रत्येक माह प्राप्त होने वाली वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की राशि भी अब मासिक औसत के रूप से 2 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गई है। अप्रेल 2025 माह में तो केंद्र सरकार को रिकार्ड 2.36 लाख करोड़ रुपए की राशि का राजस्व वस्तु एवं सेवा कर की मद से प्राप्त हुआ था। इसी प्रकार, मई 2025 में 2.01 लाख करोड़ रुपए की राशि का राजस्व जीएसटी मद से प्राप्त हुआ है। देश में प्रत्यक्ष कर (आय कर एवं कारपोरेट कर सहित) के रूप में प्राप्त राशि अप्रत्यक्ष कर के रूप में प्राप्त राशि से कहीं अधिक रही है। देश के आम नागरिकों के हित में यह बहुत अच्छा कार्य हुआ है क्योंकि प्रत्यक्ष कर उन नागरिकों से प्राप्त किया जाता है जो इस कर को अदा कर सकने की क्षमता एवं योग्यता रखते हैं अर्थात उनकी आय कर देने योग्य आय के स्तर से ऊपर रहती है जबकि अप्रत्यक्ष कर समाज के प्रत्येक वर्ग पर सामान्य रूप से एक जैसा लगाया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 22.26 लाख करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष कर के रूप में केंद्र सरकार को प्राप्त हुई थी जो वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्राप्त 19.60 लाख करोड़ रुपए की राशि से 13.57 प्रतिशत अधिक है। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अप्रत्यक्ष कर (जिसमें वस्तु एवं सेवा कर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क शामिल हैं) के रूप में प्राप्त राशि का लक्ष्य 16.33 लाख करोड़ रुपए का निर्धारित किया गया था। अप्रत्यक्ष कर की मद की तुलना में प्रत्यक्ष कर की मद से अधिक कर राशि का संग्रहण होना यह भी दर्शाता है कि भारत में नागरिकों की कर देने योग्य आय में वृद्धि दर अधिक है एवं आय कर अदा करने वाले नागरिकों की संख्या में भी अतुलनीय सुधार हो रहा है। अर्थात, देश में उच्च आय अर्जित करने वाले नागरिकों एवं मध्यमवर्गीय नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिक अब तेज गति से मध्यमवर्गीय नागरिकों की श्रेणी में परिवर्तित हो रहे हैं। 

यदि भारत के नागरिक लगातार इसी प्रकार की आर्थिक तरक्की करते रहे तो केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों के लिए देश में पूंजीगत खर्चों में वृद्धि करने एवं समाज के लिए कल्याणकारी योजनाओं को चलाये रखने में किसी भी प्रकार की समस्या खड़ी नहीं होगी। किसी भी देश के लिए कल्याणकारी योजनाओं को चलायमान बनाए रखने के लिए वित्त की अनुपलब्धता ही मुख्य समस्या के रूप में सामने आती है। परंतु, देश के नागरिक जो गरीबी रेखा से ऊपर उठकर मध्यमवर्गीय अथवा उच्चवर्गीय परिवारों की श्रेणी में शामिल हो रहे हैं, वे यदि केंद्र एवं राज्य सरकारों की वित्त व्यवस्था को सुदृद्ध बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तो भारत के लिए आर्थिक विकास की दर को दहाई के आंकड़े तक ले जाने में कोई बहुत अधिक समय नहीं लगने वाला है। केंद्र सरकार, विभिन्न राज्य सरकारों एवं निजी क्षेत्र द्वारा देश में गरीब वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाओं को चलाने के साथ ही यदि पूंजीगत खर्चों में भी वृद्धि की जाती है तो देश के नागरिकों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर निर्मित होते हैं एवं इससे देश के नागरिक देश की आर्थिक तरक्की में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर पाते हैं। भारत में भी इसी प्रकार की व्यवस्था खड़ी होती हुई दिखाई दे रही है, जिसका डंका पूरे विश्व में बज रहा है।              

- प्रहलाद सबनानी 

सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक,

भारतीय स्टेट बैंक 

के-8, चेतकपुरी कालोनी,

झांसी रोड, लश्कर,

ग्वालियर - 474 009

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