Prabhasakshi NewsRoom: विदेश नीति पर घिरी केंद्र सरकार, सोनिया गांधी और राहुल ने PM Modi की चुप्पी पर उठाए सवाल

By नीरज कुमार दुबे | Mar 03, 2026

ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या और पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। दोनों ने कहा है कि यह समय चुप्पी का नहीं, बल्कि स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाने का है। हम आपको बता दें कि सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में लिखे आलेख के माध्यम से और राहुल गांधी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मोदी सरकार की विदेश नीति पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग वर्जित है। ऐसे में बिना युद्ध की घोषणा और कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान की गई यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून की भावना के विपरीत मानी जा रही है। वहीं राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ती शत्रुता एक पहले से ही नाजुक क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रही है। उन्होंने कहा, “करोड़ों लोग, जिनमें लगभग एक करोड़ भारतीय भी शामिल हैं, अनिश्चितता और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।”

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राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा चिंताएँ वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले संकट को और गहरा करते हैं। उन्होंने अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमलों और ईरान द्वारा अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर किए गए हमलों की निंदा की। उनका कहना था, “हिंसा से हिंसा ही जन्म लेती है। संवाद और संयम ही शांति का एकमात्र रास्ता है।'' उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल किया कि “क्या वे एक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या को विश्व व्यवस्था तय करने का तरीका मानते हैं? इस समय की चुप्पी भारत की वैश्विक साख को कमजोर करती है।”

हम आपको यह भी बता दें कि सोनिया गांधी ने सवाल उठाया है कि घटना के महज़ 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इज़राइल दौरे से लौटे थे, जहाँ उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति समर्थन दोहराया। ऐसे समय में जब गाजा संघर्ष को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है, भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहस का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत के साझेदार देश रूस और चीन ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाया है। कांग्रेस का कहना है कि भारत को भी अपनी ऐतिहासिक गुटनिरपेक्ष परंपरा और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखना चाहिए।

सोनिया गांधी ने कहा है कि भारत और ईरान के बीच संबंध केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत भी रहे हैं। 1994 में जब इस्लामिक सहयोग संगठन के कुछ सदस्य कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने का प्रयास कर रहे थे, तब तेहरान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वर्ष 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तेहरान यात्रा के दौरान भारत-ईरान संबंधों की गहराई को रेखांकित किया था। कांग्रेस का कहना है कि उस ऐतिहासिक दृष्टिकोण को वर्तमान सरकार भूलती दिख रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता भारत के लिए केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय और रणनीतिक चिंता का विषय भी है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति संविधान के अनुच्छेद 51 में निहित शांतिपूर्ण विवाद समाधान, संप्रभु समानता और अहस्तक्षेप के सिद्धांतों पर आधारित है। “भारत को नैतिक स्पष्टता के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा के पक्ष में बोलना चाहिए।" वहीं राहुल गांधी ने भी दोहराया कि भारत को सिद्धांतों पर अडिग रहना होगा। “यदि हम आज संप्रभुता की रक्षा के पक्ष में स्पष्ट आवाज नहीं उठाते, तो कल ग्लोबल साउथ के देशों को हम पर भरोसा क्यों होगा?” 

साथ ही कांग्रेस ने मांग की है कि संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर खुली बहस हो। पार्टी ने कहा है कि विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या, अंतरराष्ट्रीय मानकों का क्षरण और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता भारत के राष्ट्रीय हितों से सीधे जुड़े प्रश्न हैं। बहरहाल, सोनिया गांधी और राहुल गांधी का संदेश स्पष्ट है कि भारत को “वसुधैव कुटुम्बकम्” की अपनी परंपरा के अनुरूप न्याय, संयम और संवाद के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। उनके अनुसार, यह केवल नैतिक दायित्व नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक साख और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए भी अनिवार्य है।

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