By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 16, 2026
स्वायत्त एआई एजेंटों को लेकर भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) की चेतावनी के बीच सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि सभी कंपनियों को साइबर सुरक्षा उपाय मजबूत करने और सिस्टम में असामान्य गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि किसी भी महत्वपूर्ण संगठन की कोई अहम जानकारी से समझौता नहीं हुआ है और इस घटना को शुरुआती चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन ने ‘गंभीर’ चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि स्वायत्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एजेंटों ने भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम और गोपनीय डेटा तक बिना अनुमति पहुंच बनाई है।
सूत्रों ने कहा कि इस घटना में किसी महत्वपूर्ण संगठन को निशाना नहीं बनाया गया और न ही इससे कोई बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ या किसी अहम जानकारी से समझौता हुआ। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि इस घटना ने मौजूदा कमजोरियों को उजागर किया है। सूत्रों के मुताबिक, इसे शुरुआती चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए और कंपनियों को तत्काल साइबर सुरक्षा संबंधी बुनियादी उपाय बेहतर करने, उन्नत सुरक्षा उपकरणों में निवेश करने तथा वास्तविक समय में निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
सूत्रों ने कहा कि बड़ी कंपनियों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा संचालन केंद्रों का इस्तेमाल करना चाहिए। इनमें बार-बार लॉगिन करने की कोशिशों और असामान्य आईपी पतों से पहुंच बनाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। संगठनों को खतरों का पता लगाने और उनके जवाब में कार्रवाई स्वचालित करने के लिए मशीन लर्निंग आधारित उपकरण भी लगाने चाहिए।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि कंपनियों को साइबर सुरक्षा में निवेश करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल कंपनियां साइबर सुरक्षा के बुनियादी उपायों के पालन में गंभीर रूप से पीछे हैं। सूत्रों ने आगाह किया कि जैसे-जैसे एआई प्रणालियां स्वायत्त रूप से काम करने में अधिक सक्षम होती जाएंगी, कंपनियां इस संभावना से इनकार नहीं कर सकतीं कि एआई एजेंट बिना रुके बार-बार कोई कार्रवाई करने की कोशिश करते रहें।
सूत्रों के अनुसार, संगठनों को सिस्टम लॉग की जांच करने, असामान्य व्यवहार की पहचान करने और उभरते खतरों से वास्तविक समय में निपटने की अपनी क्षमता बेहतर करनी होगी। उनके अनुसार, सरकार भविष्य में एआई के नियमन के जरिये एआई एजेंटों से पैदा होने वाले जोखिमों से निपटने के तरीकों पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक होगा।
उन्होंने कहा कि एआई नियमन पर आगामी परामर्श पत्र में इस बात की समीक्षा की जा सकती है कि एआई एजेंटों के इस्तेमाल पर सीमाएं और दायरे तय करने की जरूरत है या नहीं।