By अभिनय आकाश | Nov 27, 2025
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई 2 दिसंबर (मंगलवार) तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के फैसले को चुनौती देने वाली मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) के संस्थापक वाइको द्वारा दायर याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सहित कई अन्य दलों ने भी राज्य में एसआईआर अभ्यास के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।
इसने चुनाव आयोग के 24 जून और 27 अक्टूबर के आदेशों को चुनौती दी थी, जिसमें एसआईआर के संचालन का निर्देश दिया गया था। याचिका में कहा गया है कि यदि एसआईआर और चुनाव आयोग के आदेशों को रद्द नहीं किया जाता है, तो उचित प्रक्रिया के बिना, लाखों मतदाताओं को अपने प्रतिनिधियों को चुनने से मनमाने ढंग से वंचित किया जा सकता है, जिससे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र बाधित हो सकता है, जो संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा हैं।
अधिवक्ता दीक्षिता गोहिल, प्रांजल अग्रवाल, शिखर अग्रवाल और यश एस. विजय के माध्यम से दायर टीवीके की याचिका में चुनाव आयोग की अधिसूचना को रद्द करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एसआईआर अनुच्छेद 14, 19, 21, 325 और 326 के तहत संवैधानिक सुरक्षा का घोर उल्लंघन है और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (आरओपीए) की धारा 21 और 23 के तहत वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। इसके अतिरिक्त, याचिका में यह भी कहा गया है कि एसआईआर बिना किसी कारण या औचित्य के मतदाता सूचियों को नए सिरे से तैयार करने के समान है, जो आरओपीए के तहत वैधानिक आवश्यकता का उल्लंघन करता है।