Hanuman Puja Niyam: हनुमान मंदिर से लौटते ही बदलें रास्ता, शनि पीड़ा से मिलेगी मुक्ति, जानिए रहस्य

By अनन्या मिश्रा | Nov 03, 2025

अक्सर लोगों से यह सुनने को मिलता है कि जिस रास्ते से हनुमान मंदिर जाना चाहिए, फिर उस रास्ते से वापस नहीं लौटना चाहिए। बता दें कि यह मान्यता हिंदू धर्म की परंपराओं और ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित है। जिसका सीधा संबंध हनुमान जी और शनिदेव भगवान से है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए बताने जा रहे हैं कि आखिर हनुमान मंदिर जाने के बाद उसी रास्ते से वापस क्यों नहीं लौटना चाहिए।

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माना जाता है कि जब कोई भक्त संकटमोचन हनुमान जी के मंदिर जाता है, तो वह अपने कष्ट, दुख, दुर्भाग्य और शनि से जुड़े दोष लेकर जाता है। वहीं मंदिर में दर्शन और पूजा करने से बाद यह सारे दोष, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा वहीं छूट जाती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक अगर आप फिर उसी रास्ते से जाते हैं, तो आप उन अशुभ प्रभावों और बाधाओं को अपने साथ लेकर आते हैं, जिनको आप मंदिर में छोड़ आए थे।

वहीं अलग रास्ता अपनाना एक नई शरुआत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। ऐसा करना यह दर्शाता है कि आपने हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया है। आप अब एक नए, बाधा मुक्त और शुभ मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। यह नियम और परंपरा जीवन में पुराने कष्टों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने और सकारात्मकता के मार्ग पर चलने का संकेत देता है। रास्ता बदने से जातक यह निश्चित करता है कि आप पुरानी समस्याओं को वापस अपने घर नहीं लाएंगे।

हनुमान जी की पूजा करने और प्रसन्न करने से शनिदेव शांत होते हैं। ऐसे में मंदिर से लौटते हुए जब आप रास्ता बदलते हैं, तो यह शनि के अशुभ प्रभाव को निष्क्रिय करने का तरीका माना जाता है। यह क्रिया बताती है कि आप शनि के दोषों से मुक्त होकर एक नए और सुरक्षित मार्ग को चुन रहे हैं। जिस पर हनुमान जी की सुरक्षा बनी है। इसलिए अधिकतर भक्त हनुमान मंदिर से वापस आते समय रास्त बदलने के नियम का पालन करते हैं।

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