18 साल में 16 प्रधानमंत्री, फिर भी राजनीतिक अस्थिरता, PM कुर्सी की लड़ाई में ओली को मिलेगी बालेन शाह से टक्कर

By अभिनय आकाश | Jan 30, 2026

नेपाल के चुनाव आयोग ने बुधवार (28 जनवरी) को कहा कि वह योजना के अनुसार चुनाव कराने के लिए तैयार है, हालांकि 5 मार्च को होने वाले मतदान के दौरान हिमालय के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की स्थिति को लेकर चिंताएं हैं। सितंबर में हुए हिंसक भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद ये चुनाव हो रहे हैं, जिन्होंने पिछली सरकार को गिरा दिया था। इन प्रदर्शनों के चलते चुनाव की प्रक्रिया तेज कर दी गई और मतदान के लिए साल के शुरुआती दौर में एक असामान्य तारीख तय की गई। आज की तारीख में, हम सभी स्थानों पर चुनाव कराने के लिए तैयार हैं। आयोग के सहायक प्रवक्ता प्रकाश न्याउपाने ने एएफपी को बताया, और कहा कि रसद, प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाएं योजना के अनुसार आगे बढ़ रही हैं। वरिष्ठ नेता केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद 3 करोड़ लोगों के देश का मार्गदर्शन करने के लिए एक अंतरिम सरकार के गठन के बाद चुनाव कराए गए थे।

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संविधान लागू होने के मात्र 18 साल में हमारे देश ने 16 प्रधानमंत्री देख लिए। यानी देश में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। जेन जी आंदोलन से आरएसपी में उभरी, लेकिन इनके दोनों प्रमुख नेताओं बालेंद्र शाह और रवि लामिछाने के चाल, चरित्र की कहानियां खूब हैं। दूसरी बात, कांग्रेस ने 79 साल के देउबा को हटाकर 49 साल के गगन थापा को अध्यक्ष बनाया है। थापा ने कभी जेन जी आंदोलन की आलोचना नहीं की, बल्कि इसके लिए उन्होंने सरकार की नाकामियों को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, ओली की एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी पार्टी (यूएमएल) भले ही लोकप्रियता के संकट से जूझ रही हो, लेकिन वह नेपाल की सबसे बड़ी सांगठनिक क्षमता वाली पार्टी है। इसके पास 10 लाख कार्यकर्ता है। उसकी पैठ मधेश से लेकर पहाड़ तक समान है। यानी तीन तरह के संगठन हैं, तीनों की ही दावेदारी है, लेकिन युवा वोट बंटा हुआ है।

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भारत को लेकर युवाओं में बढ़ रही हैं उम्मीदें

भारत की सीमा से लगे भैरहवा से लेकर काठमांडू तक हर 'चिया पसल' यानी चाय की दुकान पर सबसे ज्यादा चर्चा जेन जी की नई पार्टियों और झापा सीट की है। झापा में पूर्व पीएम ओली और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता व काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह आमने-सामने हैं।

युवा होटल व्यवसायी नवराज गिरी का कहना है कि हमें अब पुराने-बूढ़े नेता नहीं चाहिए। भारत से उम्मीदें बढ़ी हैं। युवाओं को समझ आने लगा है कि चीन उनके लिए दूर की कौड़ी है, जबकि भारत के साथ जुड़कर उनकी अंतरराष्ट्रीय ताकत भी बढ़ेगी। काठमांडू महाविद्यालय के शिक्षक रवि राज बराल कहते हैं कि इस समय आरएसपी को लेकर नेपाल में कुछ वैसा ही माहौल है जैसा एक समय दिल्ली में आम आदमी पार्टी को लेकर था कि बाकि सब भ्रष्ट पार्टियां हैं।

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