By अभिनय आकाश | May 30, 2026
पिछले 40 दिनों तक दुनिया ने अमेरिका और ईरान के बीच का खौफनाक मंजर देखा। दोनों देशों ने एक दूसरे पर इतने घातक हमले किए कि खाड़ी का इलाका बारूद के ढेर पर बैठ गया। ट्रंप की सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को टारगेट किया तो ईरान ने भी अपने मिसाइलों का मुंह अमेरिका के सहयोगियों की तरफ खोल दिया। जब तबाही हदों को पार करने लगी तो पिछले महीने इस्लामाबाद में शांति वार्ता की मेज सजी थी। लेकिन ये शांति वार्ता नाकाम हो गई। तब से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस के सिचुएशन रूम में 2 घंटे तक हाई लेवल मीटिंग की। लेकिन कोई नई डील नहीं उठाई। ट्रंप की शर्तें बिल्कुल साफ हैं। ईरान को परमाणु हथियार का सपना छोड़ना होगा। साथ ही हॉर्मोन स्टेट को बिना किसी फीस और बिना रोक-टोक के खोलना होगा। हालांकि अंदरखाने चर्चा है कि अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के सीज फायर को लेकर समझौता हुआ है। साथ ही अमेरिका ने ₹300 अरब डॉलर यानी करीब ₹25 लाख करोड़ के रिकंस्ट्रक्शन फंड और निवेश का पासा भी फेंका है। लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं।
समंदर की घेराबंदी के बीच ईरान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने सबसे घातक और अचूक एयर डिफेंस सिस्टम आराश एक कामगीर को मोर्चे पर तैनात कर दिया है। आराश कामगीर ईरान का नया स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे ड्रोन और हवाई लक्ष्यों को पहचानने और मार गिराने के लिए विकसित किया गया है। इसी की मदद से अमेरिका के MQ9 रिपर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया था। ईरान का दावा है कि उसका एनआर डिफेंस सिस्टम आसमान में उड़ने वाली किसी भी आफत को राख करने की ताकत रखता है। तेहरान ने साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी रिपर ड्रोन ने उसकी सीमा लाघने की हिमाकत की तो अनावश्यक कामगीर उसे पल भर में मार गिराएगा। फिलहाल खाड़ी के इलाके में एक बेहद नाजुक संघर्ष विराम तो लागू है लेकिन बारूद के इस ढेर को सुलगाने के लिए महज एक चिंगारी की जरूरत है। एक तरफ अमेरिका की कड़क नाकेबंदी है तो दूसरी तरफ ईरान के घातक या डिफेंस सिस्टम का पहरा। यह तनाव किसी शांति की तरफ बढ़ेगा या फिर महाविनाश के नए दौर की शुरुआत करेगा।