चेसिस पुरानी, ख़्वाब नए (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Oct 07, 2024

चेसिस, ऐसी फ्रेम होती है जिसमें लाखों करोड़ों रूपए के वाहन के तरह तरह के हिस्से फिट किए जाते हैं। हमारा शरीर, एक महाटिकाऊ चेसिस और दूसरे पार्टस का समूह है जिसमें मांस, नसें, खून, रंग रूप के साथ आत्मा नाम की चिड़िया बसती है। मानवीय चेसिस का कोई मूल्य नहीं यह वास्तव में अमूल्य है। चेसिस पर चढी लचीली मुलायम त्वचा जब तक सुन्दर, युवा और सुगठित रहती है इसके दीवाने बरकरार रहते हैं। 

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नश्वर शरीर की जीवंत अदाओं के कारण ही अनेक लुभावने ख़्वाब ज़िंदगी में पनपते हैं। मानवीय चेसिस के अंदर फिट दिमाग बचपन से ही सपने देखता है और दूसरी चेसिस को दिखाता है। आकर्षक व्यक्तित्व के ख़्वाब पूरे होने में ज़्यादा समय नहीं लगता। प्यार और नफरत में चेसिस एक दूसरे से टकराती हैं। सामने से भिडंत भी होती है। बहुत नुकसान होता है। लोग तमाशा देखते हैं। दुर्घटना के बाद चेसिस की मरम्मत मेहनत मांगती है, इसलिए महंगी होती है। 

कितनी बार पैसा ही पैसा खर्चने के बावजूद चेसिस ठीक नहीं हो पाती। पैसा सब कुछ नहीं कर पाता। एक बार अस्थि पिंजर हिल जाए तो मूलरूप रंग कहां वापिस आता है। चेसिस को पता है, जो दुनिया में आया है उसे एक दिन जाना है, जो बना है उसे नष्ट होना है। जो चीज़ें प्लास्टिक की तरह नष्ट न हों उन्हें कोने में पड़ा रहना है। ज़िंदगी की रेलमपेल ऐसी है जिसमें चेसिस पुरानी हो जाती है लेकिन कई पुराने ख़्वाब रह जाते हैं । इधर नए ख़्वाब देखना नहीं छूटता। चेसिस में बसा दिमाग यह समझ जाता है कि कुछ ख़्वाब सिर्फ देखने के लिए होते हैं, कभी पूरे नहीं होंगे। इसलिए कितनी ही बार संजीदा कोशिश भी नहीं की जाती। जिन सपनों को पूरा करने के लिए दूसरों का सहयोग लिया जाता है उनमें से कुछ पूरे हो भी जाते हैं। 

कुछ विरले ख़्वाब ऐसे होते हैं जो धीरे धीरे धरोहर में तब्दील हो जाते हैं। पुरानी होती मानवीय चेसिस उन्हें ज़्यादा सुरक्षित रखती है। कभी दोबारा देख लेती है और हल्की सी मुस्कराहट के साथ फिर से सम्भाल कर रख लेती है। ऐसे खूबसूरत ख़्वाबों पर दूसरे हंसते हैं। इन सपनों में अनेक अपूर्ण मानवीय इच्छाएं होती हैं, रोमांटिक पतंगें होती हैं, मांसाहारी स्वाद होते हैं। चेसिस बदलते वक़्त के साथ नवीनीकरण चाहती है। 

नवीनीकरण हो जाए तो तमन्नाएं फिर जवान होने लगती हैं। उन्हें सहेजा जा सकता है लेकिन नियम और शर्तें लागू होती हैं। पुरानी चेसिस अनेक रंग और ढंग बदलती है लेकिन बात है कि बनती नहीं। पुरानी चेसिस फिर भी लगातार नए ख़्वाब देखती रहती है।

- संतोष उत्सुक

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