छठ पूजा में जरूरी हैं ये चीज़ें, जानें नहाय खाय से लेकर अर्घ्य की तिथि और पूजन विधि

By प्रिया मिश्रा | Nov 06, 2021

जल्द ही बिहार का महापर्व छठ शुरु होने वाला है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस बार छठ पूजा 08 नवंबर 2021 (सोमवार) को है। छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से होती है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मुख्य पूजा के बाद सप्तमी की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का समापन होता है। छठ का व्रत बहुत ही कठिन होता है इसमें पूरे 36 घंटे तक बिना कुछ खाए पीए रहना होता है। चार दिन तक चलने वाला यह महापर्व बिहार के अलावा झारखण्ड और पूर्वी उत्तर भारत में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। छठ पूजा में सूर्य की आराधना का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठी माता को सूर्य देवता की बहन माना जाता हैं। मान्यताओं के अनुसार छठ पूजा में सूर्य की उपासना करने से छठ माता प्रसन्न होती हैं और परिवार में सुख-शांति और संपन्नता का आशीर्वाद देती हैं। छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से होती है और इसके अगले दिन खरना होता है। तीसरे दिन स्नान कर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और प्रसाद तैयार किया जाता है। छठ के आखिरी दिन उगते हुए सूर्य की आराधना की जाती है। आइए जानते हैं इस साल छठ पूजा की तिथियाँ, पूजा का शुभ मुहूर्त और छठ पूजा में किस दिन क्या किया जाता है-

08 नवंबर 2021 (सोमवार) - चतुर्थी (नहाय-खाय)

09 नवंबर 2021 (मंगलवार) - पंचमी (खरना)

10 नवंबर 2021 (बुधवार) - षष्ठी (डूबते सूर्य को अर्घ)

11 नवंबर 2021 (गुरुवार) - सप्तमी (उगते सूर्य को अर्घ)

पूजन सामग्री 

व्रती के लिए नए कपड़े 

बांस या पीतल का सूप 

प्रसाद रखने के लिए बांस की टोकरी

नारियल और चावल 

गन्‍ने

मिट्टी के दीपक

धूपबत्‍ती, कुमकुम, बत्‍ती, सिंदूर, चौकी

केला, सेब, सिंघाड़ा, हल्‍दी, मूली, शकरकंदी और सुथनी

पान और सुपारी

शहद, मिठाई, गुड़, गेहूं और चावल का आटा

गंगा जल और दूध

छठ पूजा में किस दिन क्या होता है -

छठ पूजा की शुरुआत चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय से हो जाती है। इस बार नहाय खाय 08 नवंबर (सोमवार) को है। नहाय-खाय के दिन लोग घर की साफ-सफाई करते हैं। इस दिन लोग नए वस्त्र धारण कर सात्विक आहार लेते हैं। इसके बाद लोग छठ मैया का व्रत रखते हैं और सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही पारण करते हैं। व्रत से पूर्व नहाने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करने को ही नहाय-खाय कहा जाता है। 

खरना 

इसके बाद पंचमी तिथि को खरना होता है जिसमें व्रती को दिन में व्रत करके शाम को सात्विक आहार जैसे गुड़ की खीर, कद्दू की खीर आदि ग्रहण करना होता है। इस दिन मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनाने की परंपरा है। 

षष्ठी 

छठ पूजा के दिन षष्ठी को व्रती को निर्जला व्रत रखना होता है। यह व्रत खरना के दिन शाम से शुरू होता है। छठ यानी षष्ठी तिथि के दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्यदिया जाता है। इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देने और पूजा के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाती हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। इसके बाद सप्तमी को उगते हुए सूर्य को अर्घ्यदिया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बाँट कर करीब 36 घंटे चलने वाला निर्जला व्रत समाप्त होता है।

- प्रिया मिश्रा 

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